September 18, 2026

जेन-जी से मोहन भागवत का संवाद- अहंकार देता है सब कुछ अपने नियंत्रण में होने का भ्रम, धर्म को समझने के लिए सोच बदलना जरूरी

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नई दिल्ली। उज्जैन में आयोजित युवा धर्म संसद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने युवाओं से धर्म संस्कृति और जीवन मूल्यों को लेकर संवाद किया। तीन दिवसीय युवा धर्म संसद के दूसरे दिन भागवत ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि धर्म को केवल बुढ़ापे से जोड़कर देखना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि गीता और रामायण को अक्सर लोग रिटायरमेंट के बाद पढ़ने वाली किताबों के तौर पर देखते हैं लेकिन धर्म व्यक्ति के जीवन की शुरुआत से अंत तक बना रहता है। उज्जैन में आयोजित इस कार्यक्रम में देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए।

मोहन भागवत ने अपने संबोधन में अहंकार को लेकर भी युवाओं से बात की। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति अहंकार में यह मानकर काम करता है कि सब कुछ उसके नियंत्रण में है और हर चीज उसकी इच्छा के अनुसार होनी चाहिए तो वह एक तरह के भ्रम में पड़ जाता है। उन्हें लगता है कि परिस्थितियां भी उनकी इच्छा के मुताबिक ही चलेंगी लेकिन ऐसा नहीं होता। भागवत ने प्रकृति के नियमों का उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ चीजें अपने निर्धारित नियमों के अनुसार चलती हैं। व्यक्ति उनके बारे में विश्वास करे या न करे लेकिन उनका होना और अपना काम करना जारी रहता है।

उन्होंने युवाओं से कहा कि धर्म को समझने के लिए पहले से मन में बैठी धारणाओं पर भी विचार करना जरूरी है। भागवत ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य युवाओं के दिमाग को किसी खास विचार से भरना नहीं है। उन्होंने युवाओं से अपने स्तर पर सोचने और चर्चा करने की बात कही। उनके अनुसार धर्म को समझने की प्रक्रिया इतनी व्यापक है कि व्यक्ति पूरा जीवन इसके अर्थ को समझने में लगा सकता है।

भागवत ने धर्म को केवल पूजा या किसी एक धार्मिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं बताया। उन्होंने कहा कि धर्म का संबंध व्यक्ति के आचरण और कर्तव्य से भी है। जिस तरह पानी का स्वभाव बहना है और आग का स्वभाव जलना है उसी तरह व्यक्ति और समाज के लिए भी उनके स्वभाव और जिम्मेदारी के अनुरूप कर्तव्य निर्धारित होते हैं। उन्होंने कहा कि धर्म का एक अर्थ कर्तव्य भी है। पुत्र का अपना कर्तव्य है तो राजा का अपना कर्तव्य होता है।

उन्होंने महाभारत और भगवद्गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि महाभारत के माध्यम से धर्म को समझने के कई प्रसंग सामने आते हैं। उनके अनुसार युधिष्ठिर ने अपने जीवन में धर्म को समझने और उसका पालन करने का प्रयास किया। भागवत ने युवाओं से कहा कि सुख और इच्छाओं की पूर्ति के लिए भी धर्म के रास्ते को छोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने डर लालच या किसी अन्य दबाव में धर्म से विचलित नहीं होने की बात कही।

युवा धर्म संसद का आयोजन उज्जैन में 17 से 19 सितंबर तक किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार इसमें 24 राज्यों से 1500 से अधिक युवा शामिल हो रहे हैं। कार्यक्रम में धर्म संस्कृति शिक्षा तकनीक परिवार मानवीय मूल्य और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका जैसे विषयों पर संवाद हो रहा है। 19 सितंबर को होने वाले समापन कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के शामिल होने की जानकारी दी गई है।

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