सड़क-लाइट के फंड पर कमीशन की मांग? भास्कर के स्टिंग में कैश लेनदेन और विधायक निधि की डील का दावा
रिपोर्ट के मुताबिक भास्कर की टीम ने NGO मैनेजर बनकर पहले भाजपा विधायक जय मंगल कन्नौजिया से संपर्क किया। सोलर लाइट लगाने के लिए विधायक निधि से राशि स्वीकृत कराने की बात हुई। इसके बाद कई दौर की बातचीत के बाद कथित तौर पर 35 प्रतिशत कमीशन पर सहमति बनने का दावा किया गया। रिपोर्ट में बातचीत का हवाला देते हुए बताया गया कि 10.50 लाख रुपए के प्रस्ताव पर कमीशन की रकम को लेकर चर्चा हुई और बाद में कैश लेनदेन भी हुआ।
इन्वेस्टिगेशन के अनुसार पहले 50 हजार रुपए दिए गए और इसके बाद बाकी रकम को लेकर बातचीत हुई। रिपोर्ट में दावा है कि बाद की मुलाकात में अतिरिक्त रकम भी दी गई। कुल मिलाकर 83 हजार 500 रुपए लिए जाने का दावा किया गया है। इसके अगले दिन विधायक की ओर से 10.50 लाख रुपए की सोलर लाइट के काम के लिए अनुशंसा-पत्र दिए जाने की बात रिपोर्ट में कही गई है। इस पूरे मामले ने विधायक निधि से जुड़े कामों में पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इसके बाद भास्कर की टीम ने आजमगढ़ जिले की मेंहनगर सीट से सपा विधायक पूजा सरोज से जुड़े मामले की पड़ताल की। रिपोर्ट के मुताबिक सोलर लाइट और वाटर कूलर लगाने का प्रस्ताव लेकर विधायक से संपर्क किया गया। कई दौर की बातचीत के बाद कथित तौर पर कमीशन को लेकर चर्चा हुई। रिपोर्ट में विधायक के हवाले से 50 प्रतिशत कमीशन एडवांस लेने की मांग किए जाने का दावा किया गया है। प्रस्तावित कामों का कुल बजट करीब 31 लाख रुपए बताया गया और 35 प्रतिशत कमीशन के हिसाब से रकम का हिसाब लगाया गया।
रिपोर्ट के अनुसार विधायक की ओर से पहले करीब पांच लाख रुपए देने की मांग की गई। बातचीत के दौरान एक लाख रुपए दिए जाने का भी दावा किया गया है लेकिन कथित तौर पर पूरी रकम एक साथ देने की बात कहते हुए वह पैसा वापस कर दिया गया। बाद में विधायक के प्रतिनिधि की ओर से चार अनुशंसा-पत्र भेजे जाने का दावा किया गया। रिपोर्ट में इन पत्रों में कुल 81 लाख रुपए के कामों की विधायक निधि से स्वीकृति का उल्लेख किया गया है। हालांकि भास्कर टीम का दावा है कि स्टिंग के बाद इन अनुशंसा-पत्रों की हार्ड कॉपी लेने के लिए वह वापस नहीं गई।
इन दोनों मामलों में सिर्फ विधायकों पर ही नहीं बल्कि उनके करीबी लोगों पर भी कथित रूप से पैसे लेने के आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक एक विधायक के प्रतिनिधि ने अलग-अलग मौकों पर रकम ली जबकि दूसरे मामले में विधायक के करीबी व्यक्ति पर भी पैसे लेने का आरोप है। इससे यह सवाल और गंभीर हो जाता है कि अगर विधायक निधि के कामों में इस तरह का कथित कमीशन तंत्र मौजूद है तो विकास कार्यों की गुणवत्ता और वास्तविक लागत पर इसका क्या असर पड़ सकता है।
उत्तर प्रदेश में प्रत्येक विधायक को हर साल विधायक निधि के तौर पर पांच करोड़ रुपए उपलब्ध होने की बात रिपोर्ट में कही गई है। इस राशि का इस्तेमाल सड़क नाली पेयजल स्ट्रीट लाइट सामुदायिक भवन और अन्य स्थानीय विकास कार्यों में किया जा सकता है। ऐसे में इस फंड से जुड़ी किसी भी कथित अनियमितता का असर सीधे जनता के विकास कार्यों पर पड़ता है।
कानूनी जानकारों के मुताबिक सरकारी काम के बदले रिश्वत या कमीशन लेना गंभीर अपराध की श्रेणी में आ सकता है और भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत कार्रवाई संभव है। अब इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि स्टिंग में सामने आए कथित लेनदेन की आधिकारिक जांच होती है या नहीं और संबंधित विधायकों पर क्या कार्रवाई की जाती है। दैनिक भास्कर ने इस इन्वेस्टिगेशन के अगले हिस्से में CDO कार्यालय में कथित कमीशन व्यवस्था से जुड़े और खुलासे करने की बात कही है। ऐसे में इस मामले की अगली कड़ी पर भी नजर रहेगी।
