May 28, 2026

बंगाल में TMC में अंदरूनी संकट गहराया, दो और पार्षदों ने छोड़े पद, नेतृत्व पर उठाए सवाल

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। अब पार्टी के मजबूत माने जाने वाले शहरी निकायों और नगर निगमों में भी बगावत के सुर सुनाई देने लगे हैं। ताजा घटनाक्रम में कोलकाता नगर निगम के दो वरिष्ठ पार्षदों ने अपने महत्वपूर्ण पदों से इस्तीफा दे दिया है।

बुधवार को टीएमसी नेता सुशांत घोष ने बरो-12 चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया, जबकि अरूप चक्रवर्ती ने नगर निगम की अकाउंट्स कमेटी के चेयरमैन पद छोड़ने का ऐलान किया। हालांकि दोनों नेताओं ने फिलहाल पार्षद पद नहीं छोड़ा है।

नेतृत्व के खिलाफ खुलकर नाराजगी
इस्तीफे के साथ दोनों नेताओं ने पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। अरूप चक्रवर्ती ने कहा कि चुनावी हार को स्वीकार करना जरूरी है, क्योंकि हार मानने से इनकार करने पर पिछली जीतों का महत्व भी खत्म हो जाता है। राजनीतिक गलियारों में उनके बयान को पार्टी नेतृत्व पर सीधा हमला माना जा रहा है।

दोनों नेताओं का आरोप है कि चुनाव परिणाम आने के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता और मंत्री आम कार्यकर्ताओं और पार्षदों से दूरी बना चुके हैं। चक्रवर्ती ने कहा कि लंबे समय तक कुछ प्रभावशाली नेताओं ने मुख्यमंत्री तक पहुंच को भी सीमित कर दिया था और अब हार के बाद वही नेता सार्वजनिक जीवन से गायब हैं।

भाजपा सरकार की तारीफ से बढ़ीं अटकले
सुशांत घोष ने अपने घर के बाहर हुए जानलेवा हमले का जिक्र करते हुए पुलिस जांच पर सवाल उठाए और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

भवानीपुर से शुरू हुआ असंतोष
टीएमसी के भीतर विरोध का यह सिलसिला हाल ही में तब शुरू हुआ था, जब पार्षद देबोलीना बिस्वास ने केएमसी के बरो-9 अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था। भवानीपुर विधानसभा सीट पर पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद यह नाराजगी सामने आई थी। भवानीपुर को लंबे समय तक टीएमसी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है।

पार्टी के भीतर बढ़ रहा संकट
राज्य की सत्ता से बाहर होने के बाद टीएमसी में लगातार अंदरूनी खींचतान बढ़ती जा रही है। हाल ही में वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने भी पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था। कई विधायक, सांसद और पार्षद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की बैठकों से दूरी बनाए हुए हैं और संगठन की कार्यप्रणाली पर खुलकर सवाल उठा रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, सत्ता परिवर्तन के बाद अब तक 60 से ज्यादा टीएमसी पार्षद विभिन्न नगरपालिकाओं और नगर निगमों में अपने पद छोड़ चुके हैं या संगठनात्मक गतिविधियों से अलग हो गए हैं। कई पार्षदों ने कार्यालय आना भी बंद कर दिया है, जिससे नगर निकायों के कामकाज पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले एक दशक तक नगरपालिकाएं और नगर निगम टीएमसी की सबसे मजबूत राजनीतिक ताकत रहे, लेकिन अब वहीं पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनते दिखाई दे रहे हैं।

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