CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते करेगा सुनवाई, आयोग के फैसलों की प्रक्रिया पर उठे सवाल
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व वाले चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते सुनवाई करेगा। मामले को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के सामने उठाया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने मामले में जल्द सुनवाई की मांग रखी, जिसके बाद अदालत ने याचिका को अगले सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति दी। याचिका में यह सवाल उठाया गया है कि क्या चुनाव आयोग जैसे बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्थान से जुड़े फैसले अकेले मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा लिए जा सकते हैं।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के नाम पर कुछ फैसले चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की मंजूरी के बिना लिए गए। इसमें कहा गया है कि आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 और 2023 के संबंधित कानून की धारा 18 के तहत सामूहिक रूप से फैसले लेने की प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। याचिका में चुनाव आयोग के बहुसदस्यीय स्वरूप, निर्णय लेने की प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त की शक्तियों से जुड़े कई मुद्दे उठाए गए हैं। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने समेत कई मांगें भी की गई हैं।
मामले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का भी उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से सवाल उठाया गया है कि SIR से जुड़े फैसले पूरे आयोग की सहमति या बहुमत से लिए गए थे या नहीं। याचिका में दावा किया गया है कि अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कम से कम 14 मामलों में आपत्ति दर्ज की। इन आपत्तियों को चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया से जोड़कर देखा गया है और इसी आधार पर याचिका में आयोग के सामूहिक निर्णय लेने के अधिकार तथा प्रक्रिया की जांच की मांग की गई है।
याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई से जुड़ी मांगों के साथ यह भी कहा गया है कि आयोग में निहित सामूहिक शक्तियों का इस्तेमाल निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप होना चाहिए। याचिकाकर्ता ने अदालत से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि आयोग के नाम पर लिए गए फैसलों में सभी सदस्यों की भूमिका और सहमति किस तरह रही। इस मामले का एक प्रमुख हिस्सा SIR से जुड़े निर्णय हैं, जिनको लेकर याचिका में यह जानने की मांग की गई है कि संबंधित फैसले सर्वसम्मति या बहुमत के आधार पर लिए गए थे या नहीं।
वहीं, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र प्रशासनिक मुद्दों से जुड़े थे और उनका SIR या आयोग के नीतिगत फैसलों से संबंध नहीं था। ऐसे में अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की निर्णय लेने की प्रक्रिया, मुख्य चुनाव आयुक्त की शक्तियों और SIR से जुड़े फैसलों को लेकर उठाए गए सवालों पर सुनवाई होगी। अदालत अगले सप्ताह इस मामले में याचिका में की गई मांगों और उठाए गए मुद्दों पर विचार करेगी।
