July 22, 2026

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ी सख्ती, अश्लील सामग्री और कानून उल्लंघन के आरोप में 50 ओटीटी प्लेटफॉर्म ब्लॉक

0
10-1784711620
नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने अश्लील सामग्री के प्रसारण और डिजिटल कानूनों के उल्लंघन के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए पिछले दो वर्षों में 50 ओटीटी प्लेटफॉर्म की भारत में सार्वजनिक पहुंच बंद कर दी है। सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई डिजिटल माध्यमों पर गैरकानूनी सामग्री के प्रसार को रोकने और इंटरनेट को अधिक सुरक्षित एवं जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से की गई है।

लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई उन ओटीटी प्लेटफॉर्म और इंटरमीडियरी के खिलाफ की गई, जिन पर अश्लील सामग्री प्रसारित करने और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम सहित अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के उल्लंघन के आरोप थे। सरकार ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में उपलब्ध कानूनी अधिकारों का उपयोग करते हुए संबंधित प्लेटफॉर्म की भारत में सार्वजनिक पहुंच को प्रतिबंधित किया गया।

सरकार के अनुसार डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सामग्री को लेकर यदि किसी प्रकार की शिकायत प्राप्त होती है तो उसका परीक्षण किया जाता है। जांच में कानून का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित इंटरमीडियरी या प्लेटफॉर्म को गैरकानूनी सामग्री हटाने अथवा उस तक पहुंच रोकने के निर्देश जारी किए जाते हैं। आवश्यकता पड़ने पर सार्वजनिक पहुंच को भी प्रतिबंधित किया जा सकता है।

केंद्र सरकार ने कहा कि उसकी डिजिटल नीति का मुख्य उद्देश्य ऐसा इंटरनेट वातावरण तैयार करना है, जो सभी उपयोगकर्ताओं के लिए सुरक्षित, विश्वसनीय और जिम्मेदार हो। विशेष रूप से बच्चों और किशोरों को हानिकारक ऑनलाइन सामग्री से बचाने को सरकार प्राथमिकता दे रही है। इसी दिशा में डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा रहा है।

सरकार ने यह भी बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और सूचना प्रौद्योगिकी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एवं डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम, 2021 डिजिटल प्लेटफॉर्म के संचालन के लिए व्यापक कानूनी ढांचा उपलब्ध कराते हैं। इन नियमों के तहत सभी इंटरमीडियरी के लिए ड्यू डिलिजेंस का पालन करना अनिवार्य है, ताकि ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग कानून और सामाजिक जिम्मेदारी के अनुरूप हो सके।

नियमों के अनुसार डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपने उपयोगकर्ताओं को स्पष्ट रूप से यह बताना होता है कि वे ऐसी किसी भी सामग्री को अपलोड, प्रकाशित, साझा या प्रसारित न करें, जो बच्चों के लिए हानिकारक हो, अश्लील हो या देश के किसी भी लागू कानून का उल्लंघन करती हो। यदि प्लेटफॉर्म इन दायित्वों का पालन नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मनोरंजन और ऑनलाइन स्ट्रीमिंग सेवाओं के तेजी से विस्तार के साथ कंटेंट मॉडरेशन की चुनौती भी बढ़ी है। ऐसे में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानूनी जवाबदेही के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य वैध डिजिटल सेवाओं को बाधित करना नहीं, बल्कि कानून का उल्लंघन करने वाले प्लेटफॉर्म पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

सरकार ने दोहराया कि भविष्य में भी यदि किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गैरकानूनी या अश्लील सामग्री प्रसारित किए जाने की शिकायत सामने आती है और जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित कानूनों के तहत आवश्यक कार्रवाई जारी रहेगी। इसके माध्यम से सुरक्षित, पारदर्शी और जिम्मेदार डिजिटल इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में प्रयास लगातार जारी रहेंगे।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *