महुआ मोइत्रा को सुप्रीम कोर्ट से झटका, वर्चुअल पेशी की मांग खारिज, सांसद होने पर अलग सुविधा देने से कोर्ट का इनकार
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ के सामने महुआ मोइत्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि एक फेसबुक पोस्ट के संबंध में महुआ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है और पुलिस ने उन्हें उनके संसदीय क्षेत्र के संबंधित थाने में जांच अधिकारी के सामने उपस्थित होने को कहा है। उनकी ओर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने की अनुमति मांगी गई थी।
महुआ की ओर से अदालत में सुरक्षा संबंधी चिंता भी रखी गई। उनके वकील ने कहा कि पिछली बार जब वह पुलिस के सामने पेश हुई थीं, तब उनके खिलाफ प्रदर्शन और विरोध की स्थिति बनी थी। उनका दावा था कि अंडे फेंके जाने की आशंका के कारण उन्हें व्यक्तिगत रूप से थाने पहुंचने में खतरा महसूस हो रहा है। इसी आधार पर पुलिस के सामने वर्चुअल उपस्थिति की मांग की गई थी।
इस दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। अदालत ने सवाल किया कि वर्चुअल पेशी की मांग क्या इसलिए की जा रही है क्योंकि महुआ मोइत्रा संसद सदस्य हैं। पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि राजनीति में आने के बाद सार्वजनिक विरोध जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। सुनवाई के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों का उल्लेख करते हुए अदालत ने कहा कि इस तरह की याचिकाएं केवल राजनीतिक पद के आधार पर स्वीकार नहीं की जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी ध्यान दिलाया कि कलकत्ता हाई कोर्ट पहले ही महुआ मोइत्रा को जांच एजेंसी के साथ सहयोग करने का निर्देश दे चुका है। अदालत ने हाई कोर्ट के आदेश के संबंधित हिस्से का पालन करने की बात कही और स्पष्ट किया कि यदि वह जांच अधिकारी के सामने पेश नहीं होती हैं, तो इसके परिणाम उन्हें हाई कोर्ट में भुगतने पड़ सकते हैं।
आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने महुआ मोइत्रा की याचिका खारिज कर दी। इसका मतलब है कि उन्हें जांच प्रक्रिया में व्यक्तिगत रूप से शामिल होकर पुलिस के निर्देशों का पालन करना होगा। अदालत ने फिलहाल उनके लिए वर्चुअल पेशी की विशेष व्यवस्था को मंजूरी नहीं दी है।
महुआ मोइत्रा के खिलाफ यह मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद सोशल मीडिया पर किए गए दो वीडियो पोस्ट से जुड़ा है। एक बीजेपी नेता की शिकायत के बाद पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया था। यह विवाद उस समय और बढ़ा जब उनके संसदीय क्षेत्र कृष्णानगर में एक अदालत के बाहर उनके खिलाफ प्रदर्शन की स्थिति बनी और प्रदर्शनकारियों के पास अंडे और टमाटर होने की बात सामने आई।
इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने पिछले महीने महुआ मोइत्रा की एफआईआर रद्द करने की मांग पर उन्हें अंतरिम सुरक्षा दी थी, लेकिन साथ ही जांच में सहयोग करने का निर्देश भी दिया था। हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक उन्हें 14 अगस्त को जांच अधिकारी के सामने पेश होना है। सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब जांच में उनकी व्यक्तिगत पेशी का रास्ता साफ हो गया है।
