JPSC Prelims 2025 की परीक्षा पर गंभीर सवाल, सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल, रद्द करने और स्वतंत्र जांच की मांग
याचिका में कहा गया है कि परीक्षा से जुड़े कथित मामलों की निष्पक्ष तरीके से जांच होना जरूरी है ताकि अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा की जा सके और परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवालों का समाधान हो सके। याचिकाकर्ता ने अदालत से यह भी मांग की है कि यदि जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं तो 19 अप्रैल को हुई प्रारंभिक परीक्षा को रद्द कर दोबारा परीक्षा आयोजित कराने पर विचार किया जाए। इस मांग के पीछे तर्क दिया गया है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद महत्वपूर्ण होती है क्योंकि हजारों अभ्यर्थी वर्षों की तैयारी के बाद ऐसी परीक्षाओं में शामिल होते हैं।
याचिका में प्रस्तावित स्वतंत्र जांच समिति की संरचना को लेकर भी विस्तार से मांग रखी गई है। इसके मुताबिक समिति की अध्यक्षता झारखंड से बाहर के किसी सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश या किसी हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश से कराई जा सकती है। इसके अलावा समिति में फोरेंसिक साइंस और आईटी से जुड़े विशेषज्ञों के साथ परीक्षा सुरक्षा विशेषज्ञों को शामिल करने की मांग की गई है। OMR जांच और साइबर सुरक्षा के विशेषज्ञों के अलावा पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन से जुड़े जानकारों को भी समिति का हिस्सा बनाए जाने का सुझाव दिया गया है। इसका उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया से संबंधित प्रत्येक पहलू की तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर जांच करना बताया गया है।
याचिका में परीक्षा से जुड़े रिकॉर्ड और दस्तावेजों को सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है। इसमें मूल OMR शीट से लेकर प्रश्न पत्र और आंसर की तक को संरक्षित रखने की बात कही गई है। इसके साथ ही अभ्यर्थियों से संबंधित बायोमेट्रिक रिकॉर्ड परीक्षा केंद्रों की CCTV फुटेज डिस्पैच रजिस्टर परीक्षा केंद्रों की रिपोर्ट और स्कैनिंग तथा मूल्यांकन से जुड़े रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखने का अनुरोध किया गया है। याचिकाकर्ता के मुताबिक ये दस्तावेज किसी भी स्वतंत्र जांच के दौरान महत्वपूर्ण सबूत साबित हो सकते हैं।
JPSC जैसी प्रतियोगी परीक्षा में पारदर्शिता को लेकर उठने वाले सवाल सीधे तौर पर हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़े होते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की कथित गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच की मांग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल होने के बाद अब इस मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया और अदालत के रुख पर नजर रहेगी। फिलहाल परीक्षा रद्द होगी या नहीं और CBI अथवा किसी स्वतंत्र समिति से जांच कराई जाएगी या नहीं इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। इसलिए याचिका में लगाए गए आरोपों और मांगों को अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।
