पेपर लीक कानून को मिली मंजूरी, राहुल गांधी के आरोपों और विवादित शब्दों पर लोकसभा में जोरदार हंगामा
राहुल गांधी ने परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों को युवाओं के भविष्य के साथ बड़ा अन्याय बताया। उन्होंने कहा कि लाखों छात्र मेहनत के बावजूद परीक्षा प्रक्रिया की खामियों का खामियाजा भुगत रहे हैं। उनके अनुसार यह केवल परीक्षा व्यवस्था की नहीं बल्कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था की विफलता है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने में सरकार असफल रही है और शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
भाषण के दौरान राहुल गांधी ने छात्रों से हुई बातचीत का हवाला देते हुए कुछ ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया जिन पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू तुरंत खड़े हो गए और कहा कि नेता प्रतिपक्ष को संसदीय मर्यादा का पालन करना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी से अपने शब्द वापस लेने और सदन से माफी मांगने की मांग की। इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी कई बार हस्तक्षेप करते हुए असंसदीय शब्दों के प्रयोग पर आपत्ति जताई और उन्हें कार्यवाही से हटाने के निर्देश दिए।
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में यह भी आरोप लगाया कि छात्रों के प्रदर्शन के दौरान गृह मंत्री की ओर से पुलिस कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। इस दावे का सरकार ने कड़ा विरोध किया। किरेन रिजिजू ने आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि गोली चलाने जैसे आदेश किसी मंत्री द्वारा नहीं बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत सक्षम अधिकारी देते हैं। उन्होंने कहा कि इतने गंभीर आरोप बिना किसी प्रमाण के लगाना उचित नहीं है और नेता प्रतिपक्ष को सदन से माफी मांगनी चाहिए।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी अध्यक्ष से अनुरोध किया कि विवादित शब्दों को कार्यवाही से हटाया जाए। हंगामे के बीच कई बार सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों ने नारेबाजी की जिससे सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित भी हुई। बाद में कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
राहुल गांधी ने अपने भाषण में यह भी कहा कि देश का भविष्य सड़कों पर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहा है और प्रदर्शन कर रहे छात्र किसी राजनीतिक एजेंडे से नहीं बल्कि अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को केवल औपचारिक कदम बताते हुए कहा कि इससे समस्या का समाधान नहीं होगा बल्कि परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की जरूरत है।
उधर सरकार ने संशोधन विधेयक को परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम बताया। सरकार का कहना है कि नए प्रावधानों से पेपर लीक और परीक्षा में होने वाली गड़बड़ियों पर सख्त कार्रवाई का रास्ता और मजबूत होगा। वहीं विपक्ष का कहना है कि केवल कानून बनाने से समस्या खत्म नहीं होगी बल्कि उसे प्रभावी तरीके से लागू करना भी उतना ही जरूरी है।
