September 29, 2026

एलन मस्क की स्पेसएक्स ने रचा नया इतिहास, स्टारशिप पहली बार पृथ्वी की कक्षा में पहुंचा, 26 स्टारलिंक V3 सैटेलाइट भी तैनात

0
2-1790664930
नई दिल्ली। एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने अंतरिक्ष अभियान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विशाल अंतरिक्ष यान स्टारशिप पहली बार पृथ्वी की कक्षा में सफलतापूर्वक पहुंचा। इसके साथ ही मिशन के दौरान 26 अगली पीढ़ी के स्टारलिंक V3 सैटेलाइट भी कक्षा में तैनात किए गए। यह उपलब्धि पूरी तरह पुन: उपयोग योग्य प्रक्षेपण प्रणाली विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

यह उड़ान 28 सितंबर को भारतीय समयानुसार शाम 6:16 बजे शुरू हुई। यह स्टारशिप का 14वां परीक्षण था। मिशन का उद्देश्य केवल अंतरिक्ष यान को कक्षा तक पहुंचाना नहीं था, बल्कि इसके विभिन्न सिस्टम और भविष्य की अंतरिक्ष गतिविधियों से जुड़ी तकनीकों का परीक्षण करना भी था।

हालांकि उड़ान के दौरान एक तकनीकी चुनौती भी सामने आई। वाहन के छह रैप्टर वैक्यूम यानी आरवी इंजनों में से एक इंजन बंद हो गया। इससे मिशन के दौरान कुछ समय के लिए चुनौती की स्थिति बनी। इसके बावजूद बाकी इंजनों के प्रदर्शन और उनकी स्थिति का आकलन करने के बाद मिशन को जारी रखा गया और स्टारशिप कक्षा तक पहुंचने में सफल रहा।

स्टारशिप को करीब 275 किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ान भरते हुए पृथ्वी के लगभग छह चक्कर लगाने के लिए तैयार किया गया था। मिशन की शुरुआती योजना करीब 10 घंटे की थी। इसके बाद अंतरिक्ष यान को नियंत्रित तरीके से पृथ्वी के वातावरण में दोबारा प्रवेश कर प्रशांत महासागर में चिली के पश्चिमी तट के पास स्प्लैशडाउन करना था।

इस मिशन की सबसे अहम उपलब्धियों में 26 स्टारलिंक V3 सैटेलाइट की तैनाती भी शामिल रही। ये सैटेलाइट नई पीढ़ी के स्टारलिंक नेटवर्क का हिस्सा हैं। इन्हें अधिक डेटा क्षमता, ज्यादा पावर और बेहतर नेटवर्क क्षमता के लिए डिजाइन किया गया है। उपलब्ध मिशन विवरण के अनुसार प्रत्येक सैटेलाइट करीब 1 Tbps डाउनलिंक क्षमता जोड़ सकता है।

स्टारशिप-सुपर हेवी की ऊंचाई करीब 124.4 मीटर यानी 407 फीट है। इसके दो प्रमुख हिस्से हैं—सुपर हेवी बूस्टर और स्टारशिप का ऊपरी चरण। दोनों को भविष्य में तेजी से दोबारा इस्तेमाल किए जाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

मिशन में सुपर हेवी बूस्टर की चढ़ाई, स्टेज सेपरेशन, बूस्टबैक बर्न और लैंडिंग बर्न भी महत्वपूर्ण परीक्षणों का हिस्सा थे। पिछले परीक्षणों में सामने आई समस्याओं को देखते हुए हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर में बदलाव किए गए थे।

स्टारशिप के ऊपरी चरण ने ऑर्बिटल इंसर्शन मैनूवर के साथ 26 स्टारलिंक V3 सैटेलाइट तैनात किए। इसके बाद रैप्टर इंजन की मदद से डीऑर्बिट बर्न और नियंत्रित पुनः प्रवेश की प्रक्रिया पूरी करने की योजना थी। तीन स्टारलिंक V3 सैटेलाइटों में अतिरिक्त कैमरे भी लगाए गए, जिनका इस्तेमाल स्टारशिप की हीट शील्ड की तस्वीरें लेने के लिए किया जाना था।

कक्षा में पहुंचने के बाद सैटेलाइट अपने एंटीना और सोलर एरे तैनात करेंगे। इसके बाद रेडियो फ्रीक्वेंसी और लेजर लिंक के जरिए ग्राउंड सिस्टम तथा मौजूदा नेटवर्क से संपर्क स्थापित किया जाएगा। ऑर्बिट में जरूरी जांच पूरी होने के बाद कुछ हफ्तों में इनके ग्राहकों को सेवा देने की उम्मीद है।

स्टारशिप की यह उड़ान भविष्य में पृथ्वी की कक्षा से आगे चांद और मंगल तक इंसानों तथा कार्गो को पहुंचाने की क्षमता विकसित करने के लक्ष्य की दिशा में एक अहम परीक्षण है।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *