सरकारी नौकरी के नाम पर हाईटेक ठगी का खुलासा, ChatGPT और स्पाई डिवाइस से कराते थे परीक्षा में नकल
नई दिल्ली । सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक हाईटेक नकल गिरोह का दिल्ली पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर सरकारी भर्ती परीक्षाओं में उम्मीदवारों को नकल कराने का काम करता था।
पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य ChatGPT, स्पाई कैमरा, GSM डिवाइस और नैनो ईयरबड जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करते थे। परीक्षा केंद्र में बैठे उम्मीदवारों को ऐसे उपकरण दिए जाते थे, जिनकी मदद से प्रश्न बाहर बैठे लोगों तक पहुंचाए जाते थे और फिर उनके जवाब उम्मीदवारों तक पहुंचाए जाते थे।
मामले का खुलासा उस समय हुआ जब 26 जुलाई को सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी की ओर से आयोजित एलडीसी भर्ती परीक्षा के दौरान दो उम्मीदवारों को संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर पकड़ा गया। परीक्षा में नकल की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और धीरे-धीरे पूरे नेटवर्क तक पहुंच बनाई।
जांच के दौरान पुलिस ने हेमंत शर्मा, आरती, सनी, दीपक, वेद प्रकाश, वीरेंद्र और सोनू कुमार को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, सोनू कुमार इस गिरोह का मुख्य संचालक था। वह चंडीगढ़ में सरकारी विभाग में फायरमैन के पद पर कार्यरत बताया जा रहा है। आरोप है कि नौकरी के दौरान ही उसने परीक्षा में नकल कराने का नेटवर्क तैयार किया।
पुलिस जांच में पता चला कि गिरोह पहले सरकारी नौकरियों की भर्तियों पर नजर रखता था। इसके बाद नौकरी पाने के इच्छुक युवाओं से संपर्क कर उन्हें परीक्षा पास कराने का भरोसा दिया जाता था। इसके लिए उम्मीदवारों से 8 से 12 लाख रुपये तक की रकम तय की जाती थी।
गिरोह की कार्यप्रणाली काफी आधुनिक थी। उम्मीदवारों को विशेष GSM डिवाइस, मॉडिफाइड मोबाइल फोन, शर्ट के बटन में छिपा कैमरा और छोटे आकार के ईयरबड उपलब्ध कराए जाते थे। परीक्षा के दौरान कैमरे की मदद से प्रश्नों की तस्वीरें बाहर बैठे मास्टरमाइंड तक पहुंचाई जाती थीं।
पुलिस के मुताबिक, सोनू कुमार इन सवालों के जवाब तैयार करने के लिए ChatGPT की मदद लेता था। इसके बाद तैयार जवाबों को नैनो ईयरबड के जरिए परीक्षा दे रहे उम्मीदवारों तक पहुंचाया जाता था। पूरी प्रक्रिया को नियंत्रित करने के लिए एक कार में विशेष तकनीकी व्यवस्था भी बनाई गई थी।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी डिजिटल एप्लीकेशन की मदद से मोबाइल स्क्रीन और कैमरे से भेजी गई तस्वीरों को नियंत्रित करते थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, GSM डिवाइस, नैनो ईयरबड, टैबलेट, कार और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं।
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया है कि वे कई उम्मीदवारों को इस तरीके से परीक्षा पास कराने में मदद कर चुके हैं। पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह से जुड़े मामलों की संख्या अभी और बढ़ सकती है। जांच एजेंसियां बरामद डिजिटल उपकरणों की जांच कर रही हैं, जिससे गिरोह के अन्य सदस्यों और इसके पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह केवल दिल्ली तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके संपर्क अन्य राज्यों तक फैले होने की जानकारी मिली है। मामले में आगे की जांच जारी है और पुलिस अन्य संभावित आरोपियों की तलाश कर रही है।
