October 23, 2026

अरुणाचल सीमा पर चीनी सैनिकों से आमना-सामना, ITBP ने तैयार कीं शौर्य कमांडो टीमें..

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नई दिल्ली । भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव की स्थिति को लेकर भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि राज्य के कई सीमावर्ती स्थानों पर भारतीय जवानों और चीनी सैनिकों के बीच आमने-सामने की स्थिति बनी है। इनमें से कुछ स्थानों पर ऐसी परिस्थितियां अब भी जारी हैं। उन्होंने बल के जवानों को संबोधित करते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात ‘शौर्य कमांडो’ टीमों के प्रदर्शन की सराहना की।

यह जानकारी आईटीबीपी के 65वें स्थापना दिवस से पहले आयोजित ‘हिमवीर सम्मान समारोह’ के दौरान सामने आई। कपूर ने कहा कि हाल के दिनों में अरुणाचल प्रदेश के कई इलाकों में जवानों को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है। इन स्थितियों में तैनात शौर्य कमांडो टीमों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार सतर्कता बनाए रखने और कठिन परिस्थितियों से निपटने के लिए बल अपनी परिचालन क्षमताओं को मजबूत कर रहा है।

आईटीबीपी प्रमुख के अनुसार, बल की प्रत्येक बटालियन में कमांडो टीम तैयार की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त दो और टीमें गठित करने की प्रक्रिया चल रही है। दीर्घकालिक लक्ष्य हर बटालियन में एक पूर्ण कमांडो कंपनी तैयार करना है। इसके साथ ही विशेष अभियानों के संचालन के लिए एक अलग कमांडो बटालियन बनाने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। इन इकाइयों को विशेष रूप से पहाड़ी और अधिक ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों में काम करने के लिए तैयार किया जा रहा है, जहां मौसम, भौगोलिक परिस्थितियां और सीमित पहुंच जवानों के सामने चुनौतियां पैदा करती हैं।

सीमा सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए आईटीबीपी आधुनिक तकनीक पर भी ध्यान दे रही है। कपूर ने कहा कि ड्रोन ने युद्ध के पारंपरिक तरीकों में बदलाव किया है। रूस-यूक्रेन संघर्ष का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन और अन्य उन्नत तकनीकों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इसी को देखते हुए बल ड्रोन संचालन, पायलटों के प्रशिक्षण और ड्रोन निर्माण की अपनी क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहा है।

ड्रोन के साथ-साथ एंटी-ड्रोन प्रणालियों के विकास और इस्तेमाल की तैयारी भी की जा रही है। इन तकनीकों का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में ड्रोन से पैदा होने वाले संभावित खतरों का मुकाबला करना और निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाना है। बल की आधुनिकीकरण योजना में ड्रोन तथा एंटी-ड्रोन प्रणालियों के लिए लगभग 1,000 करोड़ रुपये निर्धारित करने की बात कही गई है। इसके अलावा वाहनों, उपकरणों और गोला-बारूद को आधुनिक बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

दुर्गम सीमावर्ती इलाकों में तेजी से आवाजाही और प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाने के लिए विशेष वाहनों, स्वचालित जमीनी वाहनों और क्विक रिएक्शन व्हीकल को भी योजना में शामिल किया गया है। इसके साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की तैयारी है। इन कदमों का उद्देश्य जरूरत पड़ने पर जवानों और उपकरणों की तैनाती को अधिक प्रभावी बनाना है।

भारत और चीन के बीच सीमा संबंधी मुद्दों पर सैन्य स्तर पर बातचीत भी जारी रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 6 सितंबर 2026 को अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र में वाचा-दमाई बॉर्डर पर्सनल मीटिंग पॉइंट पर कोर कमांडर स्तर की बैठक हुई थी। सीमा पर दोनों देशों की अलग-अलग धारणाओं के कारण कुछ क्षेत्रों में गश्त के दौरान आमने-सामने की स्थिति बनती रही है।

आईटीबीपी प्रमुख का बयान बताता है कि सीमा पर सतर्कता बनाए रखने के साथ-साथ बल अपनी विशेष इकाइयों, निगरानी प्रणालियों और आधुनिक उपकरणों को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है। हालांकि, अरुणाचल प्रदेश में जिन स्थानों पर आमने-सामने की स्थिति बनी हुई है, उनके बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

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