September 29, 2026

‘स्वच्छ वायु’ में दिल्ली ने मारी बड़ी छलांग, श्रीनगर-बेंगलुरु समेत कई बड़े शहर पीछे, इंदौर दूसरे स्‍थान पर

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नई दिल्ली।
सर्दियों में जहरीली हवा और 400 के पार पहुंचने वाले AQI के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाली दिल्ली ने ‘स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026’ में चौंकाने वाला प्रदर्शन किया है। 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों की श्रेणी में राजधानी ने 172 अंक के साथ 21वां स्थान हासिल किया है। खास बात यह है कि इस रैंकिंग में दिल्ली ने श्रीनगर, बेंगलुरु, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे कई बड़े शहरों को पीछे छोड़ दिया।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की ओर से जारी सर्वेक्षण में दिल्ली और विशाखापत्तनम को संयुक्त रूप से 21वां स्थान मिला। श्रीनगर 162.6 अंक के साथ 26वें, जबकि बेंगलुरु 152.6 अंक के साथ 32वें स्थान पर रहा। मुंबई को 160.8 अंक मिले और वह 28वें स्थान पर रही। चेन्नई 35वें और कोलकाता 38वें स्थान पर रहा।

हालांकि, दिल्ली की बेहतर रैंकिंग का मतलब यह नहीं है कि राजधानी की हवा इन शहरों से ज्यादा साफ हो गई है। दरअसल, स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में केवल वास्तविक वायु गुणवत्ता को नहीं देखा जाता, बल्कि प्रदूषण कम करने के लिए शहरों की ओर से किए जा रहे प्रयासों और उनके अमल का भी मूल्यांकन किया जाता है।

प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों पर मिलते हैं अंक

सर्वेक्षण में सड़क की धूल पर नियंत्रण, ठोस कचरा प्रबंधन, वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के उपाय, औद्योगिक उत्सर्जन की निगरानी, निर्माण एवं ध्वस्तीकरण से निकलने वाले मलबे के प्रबंधन और जन-जागरूकता जैसे कई मानकों को शामिल किया जाता है।

यही कारण है कि किसी शहर की हवा खराब होने के बावजूद यदि वह प्रदूषण नियंत्रण के लिए बेहतर योजनाएं लागू करता है तो उसे रैंकिंग में फायदा मिल सकता है। इसलिए दिल्ली की 21वीं रैंक को उसकी वायु गुणवत्ता का सीधा प्रमाण मानना सही नहीं होगा।

लखनऊ नंबर-1, इंदौर दूसरे और जबलपुर तीसरे नंबर पर

10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की सूची में लखनऊ 198 अंकों के साथ पहले स्थान पर रहा। मध्य प्रदेश का इंदौर 197 अंक लेकर दूसरे और जबलपुर 195 अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहा।

भोपाल और आगरा दोनों को 192-192 अंक मिले और वे संयुक्त रूप से चौथे स्थान पर रहे। यहां यह समझना जरूरी है कि स्वच्छता सर्वेक्षण और स्वच्छ वायु सर्वेक्षण अलग-अलग मानकों पर आधारित होते हैं। इसलिए किसी शहर की दोनों रैंकिंग की सीधे तुलना नहीं की जा सकती।

इन शहरों से आगे निकली दिल्ली

दिल्ली की 21वीं रैंकिंग कई प्रमुख शहरों से बेहतर रही। पटना 178 अंकों के साथ 16वें और हैदराबाद 19वें स्थान पर रहा। विशाखापत्तनम दिल्ली के साथ संयुक्त रूप से 21वें स्थान पर रहा।

इसके बाद मुंबई 28वें, बेंगलुरु 32वें, चेन्नई 35वें और कोलकाता 38वें स्थान पर रहा। यानी राजधानी ने मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और कोलकाता को पीछे छोड़ दिया, हालांकि पटना और हैदराबाद उससे आगे रहे।

एक साल में 11 पायदान ऊपर पहुंची राजधानी

दिल्ली के प्रदर्शन में पिछले साल के मुकाबले भी सुधार दर्ज हुआ है। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2025 में दिल्ली 32वें स्थान पर थी और उसका स्कोर 157.3 था। इस बार राजधानी का स्कोर बढ़कर 172 हो गया और रैंकिंग 21वें स्थान तक पहुंच गई।

इस तरह दिल्ली ने एक साल में 11 पायदान की छलांग लगाई है। यह प्रदूषण नियंत्रण के उपायों में सुधार का संकेत जरूर है, लेकिन राजधानी की वास्तविक वायु गुणवत्ता अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

PM2.5 और PM10 की स्थिति अब भी चिंताजनक

केंद्र सरकार ने 2025 को दिल्ली के लिए 2018 के बाद का सबसे बेहतर साल बताया था, हालांकि कोविड-19 से प्रभावित 2020 को इसमें अलग रखा गया था। इसके बावजूद राजधानी में वार्षिक औसत PM10 का स्तर 198 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और PM2.5 का स्तर 97 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया।

इसके मुकाबले राष्ट्रीय वार्षिक मानक PM10 के लिए 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और PM2.5 के लिए 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। यानी रैंकिंग में सुधार के बावजूद दिल्ली में प्रदूषण का स्तर निर्धारित मानकों से काफी ऊपर बना हुआ है।

सर्दियों में फिर लागू करना पड़ा था GRAP-IV

दिल्ली की प्रदूषण समस्या की गंभीरता 2025-26 की सर्दियों में भी देखने को मिली। जनवरी 2026 में वायु गुणवत्ता बेहद खराब होने के बाद राजधानी में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का स्टेज-IV लागू करना पड़ा था।

राजधानी में वायु प्रदूषण के पीछे कई कारण एक साथ काम करते हैं। वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण गतिविधियां, सड़क की धूल, मौसम की स्थिति और पराली का धुआं मिलकर सर्दियों में स्थिति को और गंभीर बना देते हैं।

रैंकिंग बढ़ी, लेकिन साफ हवा की चुनौती कायम

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में दिल्ली की 21वीं रैंक निश्चित रूप से यह बताती है कि प्रदूषण से निपटने के लिए किए जा रहे प्रयासों और उनके क्रियान्वयन में सुधार हुआ है। लेकिन इसे राजधानी की हवा साफ होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

असल कामयाबी तब होगी, जब दिल्ली का PM2.5 और PM10 स्तर लगातार राष्ट्रीय मानकों के करीब पहुंचे और सर्दियों में AQI 400 के पार जाने वाली स्थिति पर प्रभावी तरीके से रोक लगे। फिलहाल दिल्ली ने रैंकिंग में जरूर छलांग लगाई है, लेकिन राजधानी के सामने स्वच्छ हवा की असली परीक्षा अभी बाकी है।

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