August 7, 2026

सीजेपी समर्थकों ने संगठन में लोकतंत्र की मांग उठाई, कोर टीम से नहीं मिलने पर अभिजीत दीपके पर लगाए आरोप

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नई दिल्ली । कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी में संगठनात्मक स्तर पर असंतोष के स्वर सामने आए हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले महीने हुए छात्र आंदोलन में शामिल होने का दावा करने वाले दो युवकों ने शुक्रवार को सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके के आवास के बाहर धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने संगठन के कामकाज और आंदोलन की आगे की रणनीति को लेकर गंभीर सवाल उठाए।

अहमदाबाद से आए मनीष ब्रह्मभट्ट और राहुल पांड्या ने दीपके के आवास के बाहर पहुंचकर सड़क पर बैठकर विरोध जताया। दोनों युवकों ने दावा किया कि उन्होंने सीजेपी से जुड़े आंदोलन में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था, लेकिन इसके बाद उन्हें संगठन की कोर टीम से मिलने का अवसर नहीं दिया गया। इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने विरोध प्रदर्शन शुरू किया।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि आंदोलन किसी एक व्यक्ति या सीमित समूह तक केंद्रित नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक, यह आंदोलन देशभर के युवाओं से जुड़ा हुआ है और इसकी आगे की रणनीति तय करने में आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं और समर्थकों को भी अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए।

मनीष ब्रह्मभट्ट ने आरोप लगाया कि आंदोलन शुरू होने के समय इसका कोई स्पष्ट चेहरा नहीं था और उन्होंने तथा कई अन्य स्वयंसेवकों ने जंतर-मंतर पर आयोजित कार्यक्रम में योगदान दिया था। उनका कहना था कि इसके बाद उन्होंने सीजेपी की टीम से संपर्क कर बैठक में शामिल होने की कोशिश की, लेकिन उन्हें संगठन की बैठक में बुलाया नहीं गया।

ब्रह्मभट्ट ने संगठन के निर्णय लेने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आंदोलन की आगे की रणनीति केवल कुछ रिश्तेदारों और मित्रों के बीच बैठकर तय नहीं की जानी चाहिए। उनके अनुसार, आंदोलन से जुड़े लोगों को निर्णय प्रक्रिया में शामिल करना और उनके सुझाव सुनना जरूरी है।

प्रदर्शनकारियों ने सीजेपी में लोकतांत्रिक तरीके से कामकाज की मांग रखी। उनका कहना था कि यदि संगठन युवाओं के नेतृत्व और भागीदारी की बात करता है तो आंदोलन से जुड़े युवाओं को भी अपनी राय रखने और संगठन की दिशा तय करने में योगदान देने का अवसर मिलना चाहिए।

प्रदर्शन के दौरान युवकों ने अभिजीत दीपके के खिलाफ नाराजगी जताते हुए कहा कि वे संगठन में ऐसी व्यवस्था नहीं चाहते, जिसमें निर्णय सीमित लोगों के स्तर पर लिए जाएं। प्रदर्शनकारियों ने अपने विरोध को आगे भी जारी रखने की बात कही और आवास के बाहर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने का ऐलान किया।

मनीष ब्रह्मभट्ट ने यह भी कहा कि युवाओं के नेतृत्व में चलने वाले किसी भी संगठन के लिए पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। उन्होंने आंदोलन से जुड़े अन्य लोगों को भी सुझाव देने और रणनीति पर चर्चा के लिए आमंत्रित किए जाने की मांग की।

सीजेपी समर्थकों के इस विरोध से संगठन के भीतर नेतृत्व, निर्णय प्रक्रिया और कार्यकर्ताओं की भागीदारी को लेकर बहस शुरू होने के संकेत मिले हैं। फिलहाल प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग यही है कि आंदोलन से जुड़े लोगों को संगठन की बैठकों और रणनीतिक फैसलों में अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए। अभिजीत दीपके की ओर से लगाए गए आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है, यह घटनाक्रम का अगला महत्वपूर्ण पहलू होगा।

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