देशभर में आज अनंत चतुर्दशी की धूम…. जानिए बप्पा के विसर्जन का शुभ मुहूर्त
नई दिल्ली। देशभर में 10 दिन का गणेश उत्सव (Ganesh Utsav) आज समाप्त होने जा रहा है। यानी आज गणेश जी का विसर्जन (Ganesh Visarjan 2026 Shubh Muhurat) किया जा रहा है। वहीं, आज अनंत चतुर्दशी (Anant Chaturdashi) का त्योहार भी मनाया जा रहा है. अनंत चतुर्दशी के दिन केवल गणेश विसर्जन ही नहीं होता, बल्कि इस दिन भगवान विष्णु (Lord Vishnu) के ‘अनंत’ (असीम) रूप की पूजा भी की जाती है.
पौराणिक मान्यता के मुताबिक, गणपति विसर्जन के दिन बप्पा दोबारा अपने धाम कैलाश पर्वत की ओर प्रस्थान कर जाते है और पीछे छोड़ जाते हैं सुख, समृद्धि और शुभता का आशीर्वाद. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन तिथि पर वेदव्यास जी द्वारा बोले गए महाभारत के लेखन कार्य को पूर्ण करने के बाद गणेश जी ने शीतल जल में स्नान किया था. साथ ही, यह दिन सृष्टि के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु के ‘अनंत’ रूप की आराधना का भी विशेष पर्व माना जाता है. आइए जानते हैं अनंत चतुर्दशी के इस महापर्व पर गणेश विसर्जन का शुभ मुहूर्त और संपूर्ण पूजन विधि.।
गणेश विसर्जन का शुभ मुहूर्त
– प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत)- सुबह 06 बजकर 11 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 42 मिनट तक
– अपराह्न मुहूर्त (चर)- शाम 4 बजकर 44 मिनट से लेकर 6 बजकर 14 मिनट तक
– अपराह्न मुहूर्त (शुभ)- दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से लेकर 1 बजकर 43 मिनट तक
– रात्रि मुहूर्त (लाभ)- रात 9 बजकर 14 मिनट से लेकर 10 बजकर 43 मिनट तक.
– रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर)- 12:13 ए एम से 04:42 ए एम, सितम्बर 26
गणेश विसर्जन तिथि
द्रिक पंचांग के अनुसार, गणेश विसर्जन की चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर को रात 11 बजकर 18 मिनट पर शुरू हो चुकी है और तिथि का समापन 25 सितंबर यानी आज रात 11 बजकर 6 मिनट पर होगी.
गणेश विसर्जन की सही एवं संपूर्ण विधि
सबसे पहले विसर्जन से पूर्व गणेश जी की विधिवत अंतिम पूजा करें. गणेश जी को लाल चंदन, दूर्वा, मोदक, लड्डू, फूल और फल अर्पित करें. फिर, कपूर जलाकर गणेश जी की आरती गाएं. इसके बाद जाने-अनजाने में हुई किसी भी भूल-चूक के लिए हाथ जोड़कर क्षमा मांगें.
पूजा समाप्त होने पर कहें ये मंत्र-
“गच्छ गच्छ सुरश्रेष्ठ स्वस्थाने परमेश्वर।
यत्र ब्रह्मादयो देवाः तत्र गच्छ हुताशन॥”
इसके बाद लकड़ी के पटरे (चौकी) को थोड़ा सा हिलाएं. यह इस बात का संकेत है कि बप्पा की स्थापना का समय समाप्त हो गया है. चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर गणेश जी की प्रतिमा को विराजमान करें. साथ ही, उनके साथ पूजा सामग्री, थोड़े से चावल, और मोदक की एक छोटी सी पोटली बांधकर रखें. बाप्पा को पूरे सम्मान के साथ सिर या हाथों में उठाकर विसर्जन स्थल तक ले जाएं. रास्ते भर “गणपति बप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या!” के जयकारे लगाएं. विसर्जन स्थल (नदी, तालाब या घर के कुंड) पर पहुंचकर एक बार फिर आरती करें. तत्पश्चात प्रतिमा को धीरे-धीरे और आदरपूर्वक जल में प्रवाहित करें।
इको-फ्रेंडली विसर्जन
– एक बड़े गमले, बाल्टी या टब में साफ जल भरें.
– गणेश जी की प्रतिमा को मंत्रों और जयकारों के साथ जल में धीरे से डुबोएं.
– जब मिट्टी पूरी तरह घुल जाए, तो उस जल और मिट्टी को घर के पौधों या बगीचे में डाल दें. इससे बप्पा का आशीर्वाद पेड़-पौधों के रूप में हमेशा आपके घर में रहेगा.
