शेयर मार्केट में कमाई के लिए कहां लगाएं पैसा जोखिम और रिटर्न समझकर चुनें ये निवेश विकल्प नए निवेशकों के लिए जरूरी जानकारी
नई दिल्ली । शेयर मार्केट में निवेश करके पैसा बढ़ाने की इच्छा रखने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। खासकर युवा निवेशक अब बैंक एफडी और पारंपरिक बचत विकल्पों के साथ शेयर बाजार को भी अपने निवेश पोर्टफोलियो का हिस्सा बना रहे हैं। हालांकि शेयर मार्केट में निवेश करने से पहले यह समझना बेहद जरूरी है कि हर शेयर और हर निवेश विकल्प का जोखिम एक जैसा नहीं होता। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि आखिर शेयर मार्केट में पैसा कहां लगाया जाए और किस तरह का निवेश बेहतर हो सकता है।
शेयर बाजार में निवेश का सबसे सीधा तरीका कंपनियों के शेयर खरीदना है। जब किसी कंपनी के शेयर खरीदे जाते हैं तो निवेशक उस कंपनी में हिस्सेदारी लेता है। कंपनी के प्रदर्शन और बाजार की स्थिति के आधार पर शेयर की कीमत ऊपर या नीचे जा सकती है। अच्छे कारोबार वाली मजबूत कंपनियों के शेयर लंबे समय में बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं लेकिन शेयर बाजार में रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती। इसलिए केवल किसी के कहने पर शेयर खरीदने के बजाय कंपनी के कारोबार वित्तीय प्रदर्शन कर्ज और भविष्य की संभावनाओं को समझना जरूरी है।
नए निवेशकों के लिए Large Cap कंपनियां अपेक्षाकृत स्थिर विकल्प मानी जाती हैं क्योंकि इनमें आमतौर पर बड़ी और स्थापित कंपनियां शामिल होती हैं। वहीं Mid Cap और Small Cap कंपनियों में तेजी से बढ़ने की संभावना हो सकती है लेकिन इनके साथ उतार चढ़ाव और जोखिम भी ज्यादा हो सकता है। इसलिए निवेशक को अपनी जोखिम क्षमता और निवेश की अवधि के हिसाब से ही इन श्रेणियों में पैसा लगाने का फैसला करना चाहिए।
अगर किसी निवेशक को अलग अलग कंपनियों के शेयर चुनने में परेशानी होती है तो म्यूचुअल फंड एक विकल्प हो सकता है। म्यूचुअल फंड में निवेशकों का पैसा अलग अलग सिक्योरिटीज में लगाया जाता है और इसका प्रबंधन फंड मैनेजर करते हैं। इक्विटी म्यूचुअल फंड में शेयर बाजार से जुड़ा जोखिम रहता है लेकिन अलग अलग कंपनियों में निवेश होने के कारण पोर्टफोलियो में विविधता मिल सकती है। लंबी अवधि के लिए निवेश करने वाले लोग Systematic Investment Plan यानी SIP के जरिए नियमित रकम निवेश करने पर भी विचार कर सकते हैं।
शेयर मार्केट में निवेश करते समय पूरा पैसा एक ही शेयर या एक ही सेक्टर में लगाना जोखिम बढ़ा सकता है। अलग अलग कंपनियों और सेक्टर में निवेश करके पोर्टफोलियो को संतुलित रखने की कोशिश की जा सकती है। इसके साथ ही निवेश की अवधि भी महत्वपूर्ण है। अगर पैसा जल्द ही चाहिए तो बाजार के उतार चढ़ाव के कारण परेशानी हो सकती है। लंबी अवधि के निवेश में बाजार की छोटी अवधि की हलचल का असर कम करने का मौका मिल सकता है हालांकि इसमें भी जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं होता।
निवेश करने से पहले अपनी आय बचत और वित्तीय लक्ष्य को समझना जरूरी है। आपातकालीन जरूरतों के लिए अलग से पर्याप्त रकम रखने के बाद ही बाजार में निवेश करना बेहतर माना जाता है। किसी शेयर के पुराने रिटर्न को देखकर भविष्य में भी उसी तरह का रिटर्न मिलने की उम्मीद करना सही रणनीति नहीं है। निवेश से पहले कंपनी और निवेश उत्पाद की जानकारी समझें और जरूरत पड़ने पर SEBI पंजीकृत निवेश सलाहकार से सलाह लें। सबसे जरूरी बात यह है कि शेयर बाजार में तेजी से पैसा कमाने के बजाय अनुशासित तरीके से लंबी अवधि के वित्तीय लक्ष्य को ध्यान में रखकर निवेश की रणनीति बनानी चाहिए।
