सेंसेक्स 74,902 और निफ्टी 23,477 पर बंद, पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारतीय बाजार ने गिरावट का सिलसिला तोड़ा
कारोबार के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला। सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 74,764.23 से 21.69 अंक नीचे 74,742.54 पर खुला। इसके बाद दिन में यह 146.73 अंक यानी 0.19 प्रतिशत बढ़कर 74,910.96 के उच्चतम स्तर तक पहुंचा। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 165.75 अंक यानी 0.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,598.47 के निचले स्तर तक भी गया।
निफ्टी 50 ने पिछले बंद स्तर 23,431.50 की तुलना में 15 अंक की बढ़त के साथ 23,446.60 पर कारोबार की शुरुआत की। दिन के दौरान इंडेक्स 63.45 अंक यानी 0.27 प्रतिशत चढ़कर 23,494.95 के उच्चतम स्तर तक पहुंचा। वहीं एक समय यह 51.40 अंक यानी 0.21 प्रतिशत गिरकर 23,380.10 के इंट्रा-डे निचले स्तर पर भी पहुंचा।
व्यापक बाजार में हालांकि दबाव बना रहा। निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स क्रमशः 0.38 प्रतिशत और 0.07 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। यानी प्रमुख सूचकांकों में तेजी के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में कमजोरी देखने को मिली।
सेक्टरवार कारोबार में निफ्टी मीडिया, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी प्राइवेट बैंक का प्रदर्शन बेहतर रहा। इसके विपरीत निफ्टी मेटल, निफ्टी फार्मा, निफ्टी ऑटो, निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी एफएमसीजी में दबाव देखा गया।
निफ्टी 50 में एचसीएल टेक, हिंडाल्को और टाटा स्टील सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में रहे। दूसरी ओर एचडीएफसी लाइफ, पावरग्रिड, ओएनजीसी, भारतीय एयरटेल और टेक महिंद्रा के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी दर्ज की गई।
गुरुवार के कारोबार के दौरान बाजार के लिए पश्चिम एशिया का तनाव भी महत्वपूर्ण कारक बना रहा। मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के बीच कच्चे तेल की कीमतें 102 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहीं। तेल की कीमतों में यह मजबूती भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का कच्चा तेल आयात करता है।
ईरान की ओर से कहा गया कि छह महीने से चल रहे संघर्ष के दौरान जहाजों पर हुए सबसे बड़े हमलों में अमेरिका ने पांच ईरानी तेल टैंकरों को डुबो दिया। इसके बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास 10 जहाजों पर हमला करने की बात कही। इस घटनाक्रम के बीच कच्चे तेल की कीमतों पर असर बना रहा।
ऊंची कच्चे तेल की कीमतों से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है। इसके साथ ही इससे मुद्रास्फीति पर दबाव बढ़ने और आर्थिक विकास तथा कंपनियों की लाभप्रदता पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका रहती है। गुरुवार के सत्र में इन वैश्विक परिस्थितियों के बीच भी भारतीय बाजार ने तीन सत्रों की लगातार गिरावट के बाद कारोबार बढ़त के साथ समाप्त किया।
