UPI पर MDR शुल्क को लेकर नया मॉडल तैयार, छोटे कारोबारियों को राहत देकर बड़े मर्चेंट्स से शुल्क लेने की तैयारी
इसी चुनौती के बीच डेबिट कार्ड से जुड़े पुराने नियामकीय मॉडल को UPI के लिए संभावित आधार के तौर पर देखा जा रहा है। इस विचार के तहत शुल्क व्यवस्था ऐसी बनाई जा सकती है, जिसमें छोटे कारोबारियों को अतिरिक्त लागत से बचाया जाए और बड़े तथा संगठित कारोबारियों से सीमित शुल्क लिया जाए।
डेबिट कार्ड से जुड़े नियमों में छोटे कारोबारियों के लिए MDR की ऊपरी सीमा कम रखी गई है। सालाना 20 लाख रुपये से कम कारोबार करने वाले छोटे मर्चेंट्स के लिए अधिकतम MDR 0.40 प्रतिशत तक सीमित रखने का प्रावधान बताया गया है। इसी तरह के सिद्धांत को UPI में अपनाने पर छोटे किराना दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे कारोबारियों को शुल्क से पूरी तरह राहत देने का विकल्प बन सकता है।
दूसरी ओर बड़े शोरूम, मॉल, ई-कॉमर्स कंपनियों और संगठित रिटेल कारोबार को अलग श्रेणी में रखा जा सकता है। ऐसे कारोबारियों से उनकी भुगतान क्षमता और कारोबार के आकार के अनुसार मामूली MDR लेने का प्रस्ताव चर्चा में है। इसका उद्देश्य UPI के संचालन और भुगतान व्यवस्था की लागत को साझा करना हो सकता है, बिना छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ डाले।
इस संभावित मॉडल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू आम उपभोक्ताओं को सीधे शुल्क से बचाना है। बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में UPI के जरिए पैसे भेजने वाले ग्राहकों के लिए भुगतान मुफ्त रखने की कोशिश की जा सकती है। यानी शुल्क व्यवस्था लागू होने की स्थिति में भी इसका सीधा असर सामान्य व्यक्ति के प्रत्येक UPI भुगतान पर डालने से बचने का विकल्प रखा जा सकता है।
UPI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ लेनदेन की संख्या और डिजिटल भुगतान प्रणाली को संचालित करने के लिए आवश्यक तकनीकी ढांचे की लागत भी बढ़ रही है। भुगतान कंपनियों को सर्वर, सुरक्षा, तकनीकी रखरखाव और अन्य व्यवस्थाओं पर लगातार खर्च करना पड़ता है। ऐसे में लंबे समय तक शून्य MDR व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि की जरूरत पड़ती है।
प्रस्तावित मॉडल का एक उद्देश्य इस वित्तीय दबाव को कम करना भी हो सकता है। यदि बड़े मर्चेंट्स से सीमित शुल्क लिया जाता है, तो भुगतान व्यवस्था से जुड़े पक्षों के लिए अतिरिक्त राजस्व का स्रोत बन सकता है। इससे तकनीकी ढांचे और साइबर सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि डेबिट कार्ड से जुड़े नियमों को UPI पर उसी रूप में लागू करना तय नहीं है। UPI की मौजूदा संरचना, भुगतान प्रक्रिया और इसमें शामिल संस्थाओं को देखते हुए किसी भी शुल्क मॉडल के लिए अलग नियम और शर्तें तय करनी पड़ सकती हैं।
फिलहाल चर्चा का केंद्र यही है कि डिजिटल भुगतान की लोकप्रियता और मुफ्त लेनदेन की सुविधा बरकरार रखते हुए व्यवस्था को आर्थिक रूप से टिकाऊ कैसे बनाया जाए। यदि छोटे कारोबारियों और आम ग्राहकों को सुरक्षित रखते हुए बड़े मर्चेंट्स से सीमित शुल्क लेने का मॉडल तैयार होता है, तो UPI के विस्तार और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
