RBI का बड़ा फैसला, बैंक और NBFC की मनमानी पर लगेगी लगाम, मिस-सेलिंग रोकने के लिए 2027 से लागू होंगे सख्त नियम
लंबे समय से ऐसी शिकायतें सामने आती रही हैं कि कई बैंक और वित्तीय संस्थान अपने बिक्री लक्ष्य पूरे करने के लिए ग्राहकों को ऐसे उत्पाद बेच देते हैं जिनकी उन्हें आवश्यकता नहीं होती। कई मामलों में ऋण लेने वाले ग्राहकों को अतिरिक्त बीमा योजनाएं खरीदने के लिए प्रेरित किया जाता है, जबकि कुछ निवेश उत्पादों से जुड़े जोखिमों की पूरी जानकारी भी साझा नहीं की जाती। ऐसे मामलों को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट नियम निर्धारित किए हैं ताकि ग्राहकों को बेहतर सुरक्षा मिल सके।
नए नियमों के अनुसार यदि किसी ग्राहक को उसकी आय, निवेश क्षमता या वित्तीय आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं होने वाला उत्पाद बेचा जाता है, तो उसे मिस-सेलिंग माना जाएगा। इसी तरह किसी उत्पाद के बारे में अधूरी, भ्रामक या गलत जानकारी देना भी नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। ग्राहक की स्पष्ट और सूचित सहमति के बिना किसी वित्तीय उत्पाद की बिक्री पर भी रोक रहेगी। इसके अलावा किसी एक सेवा का लाभ लेने के लिए ग्राहक को दूसरा उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर करना भी प्रतिबंधित श्रेणी में शामिल किया गया है।
RBI ने डिजिटल युग की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए एजेंटों, मार्केटिंग एजेंसियों और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स की भूमिका पर भी विशेष ध्यान दिया है। हाल के वर्षों में बैंक और वित्तीय संस्थान अपने उत्पादों के प्रचार के लिए बाहरी एजेंसियों और डिजिटल माध्यमों का व्यापक उपयोग कर रहे हैं। नए प्रावधानों के तहत यदि कोई एजेंट या प्रचारक किसी उत्पाद के बारे में भ्रामक दावा करता है, तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था पर ही होगी। संस्थाएं यह तर्क देकर जिम्मेदारी से बच नहीं सकेंगी कि गलती किसी तीसरे पक्ष द्वारा की गई थी।
नियमों में यह भी कहा गया है कि ग्राहकों को किसी भी वित्तीय उत्पाद की फीस, जोखिम, लॉक-इन अवधि, निकासी नियम और अन्य महत्वपूर्ण शर्तों की जानकारी स्पष्ट रूप से पहले ही उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इससे ग्राहकों को सूचित निर्णय लेने में सहायता मिलेगी और बाद में विवाद की संभावनाएं कम होंगी। यदि किसी मामले में मिस-सेलिंग साबित होती है, तो प्रभावित ग्राहक को उचित राहत या धनवापसी भी मिल सकती है।
केंद्रीय बैंक ने बिक्री से जुड़े प्रोत्साहन तंत्र पर भी निगरानी बढ़ाने का निर्णय लिया है। कई बार कर्मचारियों और एजेंटों को दिए जाने वाले इंसेंटिव उन्हें आक्रामक बिक्री के लिए प्रेरित करते हैं, जिससे ग्राहक हित प्रभावित हो सकते हैं। नए नियमों के तहत संस्थानों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी प्रोत्साहन नीतियां ग्राहकों पर अनावश्यक दबाव न बनाएं। हालांकि प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन पूरी तरह समाप्त नहीं किए गए हैं, लेकिन उनके संचालन पर अधिक निगरानी रखी जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फ्रेमवर्क के लागू होने से बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी, ग्राहकों का भरोसा मजबूत होगा और वित्तीय उत्पादों की बिक्री अधिक जिम्मेदार तरीके से की जा सकेगी। आने वाले समय में यह व्यवस्था उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा और वित्तीय क्षेत्र में बेहतर प्रशासन सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
