टाटा स्टील समेत चुनिंदा शेयरों पर विशेषज्ञों की नजर, निवेशकों को खरीद स्तर और लक्ष्य पर मिली अहम सलाह
विशेषज्ञों के अनुसार मेटल सेक्टर फिलहाल सकारात्मक संकेत दे रहा है। वैश्विक बाजार में धातुओं की कीमतों में सुधार और मांग में संभावित मजबूती का लाभ भारतीय कंपनियों को मिल सकता है। इसी वजह से टाटा स्टील को इस समय प्रमुख पसंद के रूप में देखा जा रहा है। उनका मानना है कि लगभग 183 रुपये के आसपास यह शेयर निवेश के लिए उपयुक्त स्तर पर माना जा सकता है। यदि किसी कारणवश इसमें और गिरावट आती है तथा यह 170 से 172 रुपये के दायरे में पहुंचता है, तो इसे चरणबद्ध तरीके से पोर्टफोलियो में जोड़ने का अवसर माना जा सकता है।
विश्लेषकों का कहना है कि अल्पावधि में टाटा स्टील के लिए 215 से 220 रुपये का लक्ष्य संभावित माना जा रहा है। वहीं, यदि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं और मेटल सेक्टर में मजबूती जारी रहती है, तो दीर्घावधि में यह शेयर 270 रुपये तक पहुंचने की क्षमता रख सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि शेयर 170 रुपये के नीचे साप्ताहिक आधार पर बंद होता है, तो निवेशकों को अपनी रणनीति की समीक्षा करनी चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर जोखिम सीमित करने के लिए स्टॉप लॉस का पालन करना चाहिए।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश केवल संभावित रिटर्न को देखकर नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि जोखिम और पूंजी संरक्षण को भी समान महत्व देना चाहिए। किसी भी शेयर में एकमुश्त निवेश करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश करना अधिक संतुलित रणनीति मानी जाती है। इससे बाजार में उतार-चढ़ाव का प्रभाव अपेक्षाकृत कम हो सकता है और औसत खरीद मूल्य भी बेहतर बन सकता है।
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे आने के साथ विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग प्रदर्शन देखने को मिल सकता है। ऐसे में निवेशकों को केवल शेयर की कीमत पर नहीं बल्कि कंपनी की आय, लाभप्रदता, कर्ज की स्थिति, भविष्य की विकास योजनाओं और उद्योग की संभावनाओं का भी मूल्यांकन करना चाहिए। मजबूत बुनियादी स्थिति वाली कंपनियां लंबी अवधि में बेहतर प्रदर्शन करने की संभावना रखती हैं।
बाजार में फिलहाल वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, कमोडिटी कीमतों, ब्याज दरों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों का भी असर दिखाई दे रहा है। ऐसे माहौल में निवेशकों को भावनात्मक निर्णय लेने से बचना चाहिए और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत कंपनियों में अनुशासित निवेश और तय जोखिम सीमा के साथ बनाई गई रणनीति ही अस्थिर बाजार में बेहतर परिणाम देने की संभावना रखती है। उन्होंने सलाह दी कि किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय लक्ष्यों और जोखिम क्षमता का आकलन अवश्य करें तथा आवश्यकता होने पर वित्तीय सलाहकार की राय भी लें।
