July 21, 2026

सावन 2026 की शुरुआत कब होगी? जानें सही तारीख, चारों सावन सोमवार और पूजा का महत्व

0
photo4-1-1784520610

नई दिल्ली। भगवान शिव को समर्पित सावन (श्रावण) का महीना हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस पूरे महीने शिव भक्त जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, व्रत और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। हर वर्ष सावन की शुरुआत को लेकर लोगों के बीच उत्सुकता रहती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि वर्ष 2026 में सावन कब से शुरू होगा, कितने सावन सोमवार पड़ेंगे और इस महीने का धार्मिक महत्व क्या है।

सावन 2026 कब से शुरू होगा?
द्रिक पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में सावन मास 29 जुलाई (बुधवार) से प्रारंभ होकर 28 अगस्त (शुक्रवार) यानी रक्षाबंधन के दिन समाप्त होगा।

सावन के चार सोमवार
उत्तर भारत की मान्यता के अनुसार इस वर्ष सावन में कुल चार सोमवार पड़ेंगे-
– पहला सावन सोमवार: 3 अगस्त 2026
– दूसरा सावन सोमवार: 10 अगस्त 2026
– तीसरा सावन सोमवार: 17 अगस्त 2026
– चौथा सावन सोमवार: 24 अगस्त 2026

क्या है सावन का धार्मिक महत्व?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए सावन मास में कठोर तप किया था। इसी महीने समुद्र मंथन के दौरान निकले विष का पान कर भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा की थी, जिसके कारण उन्हें नीलकंठ कहा गया। विष की तीव्रता कम करने के लिए देवताओं ने शिवजी का जलाभिषेक किया था। तभी से सावन में शिवलिंग पर जल अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है। इस माह देशभर से लाखों कांवड़िए पवित्र नदियों से जल लाकर शिव मंदिरों में भगवान शिव का अभिषेक करते हैं।

सावन में ऐसे करें शिव पूजा
प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद शिवलिंग पर गंगाजल या शुद्ध जल अर्पित करें। फिर दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत अभिषेक करें तथा अंत में दोबारा शुद्ध जल चढ़ाएं।

इसके बाद चंदन का तिलक लगाकर भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, अक्षत, सफेद पुष्प और शमी के पत्ते अर्पित करें। माता पार्वती को सिंदूर और श्रृंगार सामग्री चढ़ाएं। धूप-दीप प्रज्ज्वलित कर ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। अंत में सावन सोमवार व्रत कथा का श्रवण या पाठ कर शिव आरती करें।

सावन में किए जाने वाले प्रमुख उपाय
आर्थिक समृद्धि के लिए हर सोमवार या प्रतिदिन शिवलिंग पर गन्ने का रस अर्पित करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे धन प्राप्ति के योग मजबूत होते हैं।

मनचाहा जीवनसाथी और वैवाहिक सुख के लिए कुंवारी कन्याएं तथा विवाहित महिलाएं केसर मिश्रित दूध से शिवलिंग का अभिषेक करें और माता पार्वती को चुनरी अर्पित करें।

मानसिक शांति और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति के लिए जल में काले तिल मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करें। धार्मिक मान्यता है कि इससे शनि दोष का प्रभाव भी कम होता है।

करियर और व्यापार में उन्नति के लिए भगवान शिव को शहद अर्पित करें तथा 21 बेलपत्रों पर चंदन से “राम” लिखकर चढ़ाएं। इसे सफलता और प्रगति का शुभ उपाय माना जाता है।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *