खरमास 2026: 15 मार्च से 14 अप्रैल तक मांगलिक कार्यों पर विराम, जानिए धार्मिक मान्यता, महत्व और क्या करना माना जाता है शुभ
ज्योतिषीय गणना के अनुसार 14 मार्च की रात 1 बजकर 8 मिनट के बाद सूर्य देव कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में प्रवेश करेंगे। जब सूर्य देव बृहस्पति की राशि यानी धनु या मीन में प्रवेश करते हैं तो उनकी स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाती है। इसी कारण इस अवधि को खरमास कहा जाता है और इस दौरान मांगलिक कार्यों को शुभ नहीं माना जाता। इस बार मीन संक्रांति के साथ शुरू होने वाला खरमास 14 अप्रैल को समाप्त होगा जब सूर्य देव सुबह 9 बजकर 31 मिनट पर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। इसके साथ ही मांगलिक कार्यों पर लगा विराम भी समाप्त हो जाएगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खरमास में विवाह गृह प्रवेश नए घर के निर्माण की शुरुआत मुंडन संस्कार और कर्ण छेदन जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते। मान्यता है कि इस समय शुरू किए गए दीर्घकालिक कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं या अपेक्षित सुख समृद्धि नहीं मिलती। यही कारण है कि लोग इस अवधि में नया व्यवसाय शुरू करने या बड़े निवेश करने से भी बचते हैं। हालांकि यह समय पूरी तरह निष्क्रिय रहने का नहीं माना जाता बल्कि इसे आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत श्रेष्ठ बताया गया है।
खरमास के दौरान दान पुण्य जप तप पूजा पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि इस अवधि में किए गए दान का फल कई गुना अधिक मिलता है। ब्राह्मणों गुरुजनों गायों और साधु संतों की सेवा करना भी पुण्यदायी माना गया है। इसके अलावा तीर्थ यात्रा करना धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करना और भगवान के नाम का स्मरण करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
खरमास से जुड़ी एक प्रचलित कथा भी बताई जाती है। कथा के अनुसार सूर्य देव अपने सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा करते हैं। लगातार चलते रहने से उनके घोड़े थक जाते हैं और प्यास से व्याकुल हो जाते हैं। ऐसे में सूर्य देव उन्हें विश्राम देने के लिए रथ को एक तालाब के पास रोकते हैं और घोड़ों को पानी पिलाते हैं। इस दौरान रथ को चलाने के लिए वे दो ‘खर’ यानी गधों को रथ में जोड़ देते हैं।
