वास्तु में कोई दिशा नहीं होती अशुभ, जमीन खरीदते समय इन जरूरी बातों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
विशेषज्ञों के मुताबिक प्लॉट खरीदते समय सबसे पहले उसके आकार पर ध्यान देना चाहिए। वर्गाकार या आयताकार भूखंड को वास्तु की दृष्टि से सबसे उपयुक्त माना जाता है क्योंकि ऐसे प्लॉट में ऊर्जा का संतुलित प्रवाह बना रहता है। इसके विपरीत बहुत अधिक टेढ़े मेढ़े त्रिकोण या अनियमित आकार वाले प्लॉट कई बार वास्तु दोष का कारण बन सकते हैं और निर्माण की योजना भी प्रभावित होती है।
जमीन की ऊंचाई और ढलान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार ऐसा प्लॉट बेहतर माना जाता है जिसकी दक्षिण और पश्चिम दिशा अपेक्षाकृत ऊंची हो तथा उत्तर और पूर्व दिशा थोड़ी नीची रहे। इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है और आर्थिक उन्नति के अवसर बढ़ते हैं। वहीं गलत ढलान वाले प्लॉट में जलभराव जैसी व्यावहारिक समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।
प्लॉट के आसपास का वातावरण भी उतना ही जरूरी है जितनी उसकी दिशा। यदि भूखंड के आसपास स्वच्छता हरियाली और खुला वातावरण हो तो उसे अधिक शुभ माना जाता है। इसके विपरीत कूड़े के ढेर गंदे नाले या अत्यधिक प्रदूषण वाले क्षेत्रों में स्थित जमीन भविष्य में कई तरह की परेशानियां पैदा कर सकती है। इसलिए केवल कम कीमत देखकर निर्णय लेने से बचना चाहिए।
जमीन खरीदने से पहले यह भी देखना चाहिए कि वहां तक सड़क की पहुंच कैसी है और आसपास बिजली पानी तथा अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं। अच्छी कनेक्टिविटी और विकसित क्षेत्र में स्थित प्लॉट भविष्य में बेहतर निवेश भी साबित होता है और रहने के लिहाज से भी सुविधाजनक रहता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्लॉट का चयन करते समय प्राकृतिक रोशनी और हवा का पर्याप्त प्रवाह भी ध्यान में रखना चाहिए। ऐसा भूखंड जहां सूरज की रोशनी आसानी से पहुंचे और वेंटिलेशन अच्छा हो वहां स्वास्थ्य और सकारात्मकता दोनों बनी रहती हैं। यही कारण है कि वास्तु शास्त्र प्राकृतिक तत्वों के संतुलन पर विशेष जोर देता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी दिशा को अशुभ मानकर केवल उसी आधार पर प्लॉट को नकार देना सही नहीं है। वास्तु शास्त्र दिशा से अधिक संतुलित निर्माण उचित योजना और प्राकृतिक ऊर्जा के सही उपयोग पर बल देता है। यदि भूखंड का चयन सोच समझकर किया जाए और निर्माण के दौरान वास्तु सिद्धांतों का पालन किया जाए तो किसी भी दिशा में सुख समृद्धि और सफलता प्राप्त की जा सकती है। इसलिए जमीन खरीदने से पहले केवल दिशा नहीं बल्कि आकार ढलान वातावरण सुविधाएं और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर निर्णय लेना ही सबसे समझदारी भरा कदम माना जाता है।
