Hanuman Puja: हनुमान जी को प्रिय हैं ये चीजें मंगलवार को पूजा में जरूर करें शामिल जानिए धार्मिक मान्यताएं
हनुमान जी की पूजा में सिंदूर का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक कथाओं में सिंदूर से जुड़ी हनुमान जी की एक प्रसिद्ध कथा भी मिलती है। इसी वजह से भक्त बजरंगबली को सिंदूर अर्पित करते हैं। कई मंदिरों में हनुमान जी की प्रतिमा पर सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाने की परंपरा है। मान्यता के अनुसार पूजा के दौरान भक्त श्रद्धा के साथ सिंदूर अर्पित कर सकते हैं।
हनुमान जी को गुड़ और चने का भोग लगाने की भी परंपरा है। मंगलवार के दिन भक्त गुड़ चना खरीदकर मंदिर में अर्पित करते हैं और बाद में प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। इसे बजरंगबली के प्रिय भोगों में शामिल माना जाता है। इसके अलावा केले और अन्य फल भी भगवान को भोग के रूप में अर्पित किए जा सकते हैं। भोग लगाते समय मन में श्रद्धा और भगवान के प्रति समर्पण की भावना रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।
पूजा में लाल फूल चढ़ाने की भी परंपरा है। लाल रंग को हनुमान जी से जोड़कर देखा जाता है इसलिए भक्त उन्हें लाल फूल अर्पित करते हैं। पूजा के दौरान लाल वस्त्र अर्पित करने की परंपरा भी कई स्थानों पर देखने को मिलती है। भक्त अपनी श्रद्धा और स्थानीय परंपरा के अनुसार पूजा सामग्री का चयन कर सकते हैं।
हनुमान जी की पूजा में चमेली के तेल का भी इस्तेमाल किया जाता है। कई श्रद्धालु चमेली का तेल और सिंदूर लेकर मंदिर जाते हैं। मान्यता के अनुसार इसे हनुमान जी को अर्पित करना शुभ माना जाता है। हालांकि मंदिर में किसी वस्तु को चढ़ाने से पहले वहां की पूजा व्यवस्था और नियमों का ध्यान रखना चाहिए।
हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए केवल भोग या पूजा सामग्री ही महत्वपूर्ण नहीं मानी जाती। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान चालीसा का पाठ भगवान की आराधना का प्रमुख माध्यम है। मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ करने के साथ भगवान राम के नाम का स्मरण भी किया जाता है। हनुमान जी को भगवान राम का परम भक्त माना जाता है इसलिए उनकी पूजा में राम नाम का जाप विशेष महत्व रखता है।
हनुमान जी की पूजा करते समय भक्तों को सात्विक और संयमित आचरण रखने की परंपरा है। क्रोध विवाद और गलत आचरण से दूर रहने का प्रयास किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं में यह भी कहा जाता है कि भगवान को दिखावे से अधिक सच्ची श्रद्धा और भक्ति प्रिय होती है। इसलिए पूजा में महंगी सामग्री की बजाय अपनी क्षमता के अनुसार सरल तरीके से भगवान का स्मरण करना भी पर्याप्त माना जाता है।
