September 23, 2026

चैत्र अमावस्या 2026: क्यों होगा पितरों का श्राद्ध एक दिन पहले? जानिए तारीख, मुहूर्त और महत्व

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नई दिल्ली । हिंदू धर्म में चैत्र अमावस्या का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह महीने की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को आता है और इस दिन स्नान दान तर्पण पिंडदान और श्राद्ध जैसे कार्य पितरों के लिए किए जाते हैं। इस वर्ष विशेष बात यह है कि पितरों के लिए श्राद्ध कर्म चैत्र अमावस्या से एक दिन पहले यानी 18 मार्च बुधवार को किए जाएंगे।

वैदिक पंचांग के अनुसार 2026 में चैत्र अमावस्या तिथि की शुरुआत 18 मार्च सुबह 8:25 बजे से हो रही है और समाप्ति 19 मार्च गुरुवार को सुबह 6:52 बजे होगी। अमावस्या तिथि 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे समाप्त हो जाने के कारण पितरों के श्राद्ध और तर्पण का मुहूर्त 18 मार्च के दिन ही आता है। इसे दर्श अमावस्या कहा जाता है। इस समय में 11:30 बजे से लेकर दोपहर 2:30 बजे के बीच श्राद्ध पिंडदान और दान आदि किए जा सकते हैं।

चैत्र अमावस्या के दिन का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:51 बजे से 5:39 बजे तक है जो स्नान और धार्मिक क्रियाओं के लिए उत्तम माना जाता है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा। इस बार अमावस्या शुक्ल योग और उत्तर भाद्रपद नक्षत्र में है। शुक्ल योग प्रातः से देर रात 1:17 बजे तक रहेगा जबकि उत्तर भाद्रपद नक्षत्र प्रातः से 20 मार्च को सुबह 4:05 बजे तक रहेगा।

चैत्र अमावस्या और दर्श अमावस्या दोनों ही दिन राज पंचक में आते हैं। राज पंचक इस वर्ष 16 मार्च सोमवार शाम 6:14 बजे से प्रारंभ होकर 19 मार्च तक चलेगा। इसे शुभ फलदायी पंचक माना जाता है जो दान और धार्मिक कार्यों के लिए बेहद लाभकारी है।

धार्मिक मान्यता है कि चैत्र अमावस्या के दिन पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध करने से पितृ दोष की शांति होती है। इससे परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है। वहीं जो लोग पितरों को तृप्त नहीं करते उन्हें जीवन में कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

स्नान और दान करना इस दिन विशेष पुण्य का कार्य माना जाता है। इस दिन लोग पितरों को तृप्त कर पुण्य अर्जित करते हैं और अपने जीवन में सुख-समृद्धि और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस प्रकार इस वर्ष चैत्र अमावस्या और दर्श अमावस्या का यह समय पितृ पूजा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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