शिव के नटराज रूप में छिपा ब्रह्मांड का रहस्य, पैरों तले दबा अपस्मार देता है बड़ा संदेश
नटराज की इसी प्रतीकात्मकता ने कलाकारों, दार्शनिकों और वैज्ञानिकों तक को आकर्षित किया है। ब्रह्मांड में लगातार होने वाली ऊर्जा और गति को नटराज के तांडव से जोड़ा जाता है। इसी विचार को दर्शाने वाली नटराज की विशाल प्रतिमा स्विट्जरलैंड के जिनेवा स्थित CERN परिसर में भी स्थापित है।
नटराज के पैरों के नीचे कौन है अपस्मार?
नटराज की प्रतिमा का सबसे महत्वपूर्ण प्रतीक उनके पैरों के नीचे दिखाई देने वाली बौने जैसी आकृति है। इसे अपस्मार या मुइला कहा जाता है। हिंदू पौराणिक मान्यताओं में अपस्मार को अज्ञानता, अहंकार, मूर्खता और मानसिक जड़ता का प्रतीक माना गया है। भगवान शिव का अपस्मार को पैर के नीचे दबाना इस बात का संकेत माना जाता है कि मनुष्य को अपने भीतर मौजूद अज्ञान और अहंकार पर नियंत्रण रखना चाहिए। जब तक व्यक्ति अज्ञानता से ऊपर नहीं उठता, तब तक सच्चे ज्ञान और मोक्ष की दिशा में आगे बढ़ना मुश्किल है।
नटराज का तांडव क्या संदेश देता है?
नटराज स्वरूप भगवान शिव के उस नृत्य को दर्शाता है, जिसे सृष्टि के निरंतर चक्र से जोड़ा जाता है। इसमें उत्पत्ति, स्थिति और संहार यानी निर्माण, संरक्षण और विनाश का भाव समाहित है। यह रूप यह संदेश भी देता है कि ब्रह्मांड में ऊर्जा और गति लगातार बनी रहती है। कुछ आध्यात्मिक व्याख्याओं में नटराज का नृत्य इसी सार्वभौमिक गति और परिवर्तन का प्रतीक माना जाता है।
अग्नि के घेरे का क्या अर्थ है?
नटराज की प्रतिमा के चारों ओर बना अग्नि का घेरा यानी प्रभा मंडल समय, भौतिक संसार और जन्म-मृत्यु के चक्र का प्रतीक माना जाता है। यह उस निरंतर परिवर्तन को दर्शाता है, जिससे संसार गुजरता रहता है।
डमरू में छिपा है सृष्टि के आरंभ का संकेत
भगवान शिव के दाहिने ऊपरी हाथ में मौजूद डमरू को सृष्टि की पहली ध्वनि और ब्रह्मांडीय स्पंदन का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, डमरू की ध्वनि सृजन और समय के आरंभ का संकेत देती है। वहीं, नटराज के बाएं ऊपरी हाथ में मौजूद अग्नि सृष्टि के संहार का प्रतीक मानी जाती है। इसका भाव यह है कि जिस संसार की उत्पत्ति हुई है, उसका एक दिन अंत भी निश्चित है।
अभय मुद्रा देती है निर्भय रहने का संदेश
नटराज की एक प्रमुख मुद्रा अभय मुद्रा है। इसमें भगवान शिव का हाथ ऊपर उठा हुआ दिखाई देता है। इसे भय से मुक्ति और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। इसका संदेश है कि धर्म, सत्य और आध्यात्मिक मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति को भयभीत होने की जरूरत नहीं है। इस तरह नटराज की पूरी प्रतिमा जीवन के संतुलन, ज्ञान, परिवर्तन और आत्मचेतना का संदेश देती है।
