November 6, 2026

इस्राइल में नई सरकार के गठन पर सस्पेंस बरकरार, नेतन्याहू और आइजेनकोट के बीच बहुमत की जंग में फंसा सियासी समीकरण

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नई दिल्ली ।इस्राइल में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक अनिश्चितता बनी हुई है। राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग ने गुरुवार शाम कहा कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि देश में अगली सरकार बनाने की क्षमता किस राजनीतिक खेमे के पास है। नेसेट यानी इस्राइली संसद के लिए चुने गए राजनीतिक दलों के नेताओं और प्रतिनिधियों के साथ दो दिनों तक चली बातचीत के बाद भी बहुमत को लेकर स्थिति साफ नहीं हो सकी है। राष्ट्रपति ने सभी राजनीतिक गुटों से नए विकल्प तलाशने और सरकार गठन का रास्ता निकालने की अपील की है।

राष्ट्रपति हर्जोग के अनुसार, 67 नेसेट सदस्यों के समर्थन वाले गुटों ने यशर! पार्टी के नेता गादी आइजेनकोट को सरकार बनाने के लिए अपनी पसंद बताया है। वहीं, 46 सांसदों के समर्थन वाले गुटों ने प्रधानमंत्री और लिकुड पार्टी के प्रमुख बेंजामिन नेतन्याहू के पक्ष में सिफारिश की है। हालांकि, हर्जोग ने स्पष्ट किया कि केवल समर्थन की संख्या के आधार पर सरकार बनाने का अधिकार तय नहीं किया जा सकता। कानून के तहत उन्हें यह भी देखना होगा कि संबंधित नेता वास्तव में सरकार बनाने की स्थिति में है या नहीं।

राष्ट्रपति ने कहा कि राजनीतिक गुटों के बीच और उनके भीतर मौजूद आपसी असहमतियों तथा वीटो की स्थितियों के कारण यह तय करना मुश्किल हो रहा है कि कौन स्थिर सरकार बना सकता है। उन्होंने घोषणा की कि रविवार को नेसेट के किसी एक सदस्य को सरकार गठन की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इस फैसले से पहले वह कुछ राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ व्यक्तिगत बातचीत भी करेंगे। उनका कहना है कि इन चर्चाओं का उद्देश्य इस्राइल के नागरिकों के लिए स्थिर और बेहतर सरकार का रास्ता तैयार करना है।

चुनाव परिणामों ने बनाया त्रिशंकु सदन

27 अक्तूबर को हुए चुनाव में 120 सदस्यीय नेसेट में किसी भी राजनीतिक गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गुट को 53 सीटें हासिल हुईं, जबकि उनके विरोध में बने परिवर्तन गुट को 48 सीटें मिलीं। शेष 19 सीटें अरब दलों के खाते में गईं। इस बंटवारे के कारण सरकार गठन के लिए अलग-अलग राजनीतिक दलों के समर्थन की जरूरत पैदा हो गई है।

नेतन्याहू की मुश्किल उस समय बढ़ी, जब यूनाइटेड तोराह जूडाइज्म पार्टी ने उन्हें सरकार बनाने के लिए समर्थन देने की सिफारिश नहीं की। इसके चलते उनके समर्थन में सिफारिश करने वाले सांसदों की संख्या घटकर 46 रह गई। दूसरी ओर, अरब दलों ने अनिच्छा के बावजूद गादी आइजेनकोट के समर्थन में सिफारिश की। उनका उद्देश्य नेतन्याहू को दोबारा सत्ता में आने से रोकना बताया गया है।

अरब दलों के साथ गठबंधन पर सहमति की चुनौती

इस्राइल के दोनों प्रमुख राजनीतिक गुटों के सामने अरब दलों के साथ गठबंधन को लेकर भी मुश्किलें हैं। अधिकांश दलों ने अरब पार्टियों के साथ सरकार में शामिल होने से परहेज किया है। डेमोक्रेट्स इस मामले में अलग रुख रखने वाले दलों में शामिल हैं। गठबंधन की सबसे बड़ी बाधाओं में हमास को आतंकवादी संगठन घोषित करने के मुद्दे पर अरब दलों की स्थिति है।

7 अक्तूबर 2023 को हुए घातक हमलों के बाद इस मुद्दे पर इस्राइल की अधिकांश यहूदी आबादी के बीच कड़ा रुख है। ऐसे में अरब दलों को सरकार में शामिल करना राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

हमास को लेकर मंसूर अब्बास का रुख

रा’आम पार्टी के नेता मंसूर अब्बास ने गादी आइजेनकोट के समर्थन में सिफारिश करने के बाद दो-राज्य समाधान के प्रति अपना समर्थन दोहराया। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा योजना का भी समर्थन किया। इस योजना में हमास सहित सभी सैन्य और सशस्त्र संगठनों को निहत्था करने की बात कही गई है। हालांकि, अब्बास ने हमास को आतंकवादी संगठन कहने से परहेज किया। उनके इस रुख ने संभावित गठबंधन को लेकर असमंजस और बढ़ा दिया है।

अब सभी की नजरें रविवार को राष्ट्रपति हर्जोग के फैसले पर टिकी हैं। उनके सामने चुनौती ऐसे नेता को सरकार गठन की जिम्मेदारी सौंपने की है, जो विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाकर स्थिर सरकार तैयार कर सके।

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