November 5, 2026

'बाहर ईरान, भीतर कट्टरपंथी इस्लाम…', नेतन्याहू ने इजरायल की सुरक्षा को लेकर जताई चिंता

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नई दिल्ली। इजरायल में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के बीच कार्यवाहक प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने देश की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इजरायल को बाहरी मोर्चे पर ईरान और उसके सहयोगियों से खतरा है, जबकि देश के भीतर कट्टरपंथी इस्लाम एक बड़ी चुनौती बन रहा है।

नेतन्याहू ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी बात रखते हुए कट्टरपंथी इस्लाम को यूरोप के कई देशों के लिए भी चुनौती बताया। उनके मुताबिक, यह खतरा इजरायल को भी प्रभावित कर सकता है। उन्होंने कहा कि ईरान और उसके सहयोगियों से बाहरी सुरक्षा चुनौती मिल रही है, जबकि इस्लामवादी पार्टियों के जरिए देश के भीतर से खतरा पैदा हो रहा है।

विपक्ष पर हमास समर्थक दलों के साथ सरकार बनाने का आरोप

नेतन्याहू ने विपक्षी नेताओं पर आरोप लगाया कि वे ऐसी पार्टियों के समर्थन से सरकार बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जो उनके मुताबिक हमास का समर्थन करती हैं। उन्होंने कहा कि इन दलों की सरकार में भागीदारी से इजरायल की यहूदी पहचान कमजोर हो सकती है और देश की रक्षा क्षमता पर भी असर पड़ सकता है।

उन्होंने दावा किया कि इन पार्टियों के प्रतिनिधियों ने हमास की नुखबा यूनिट के उन सदस्यों के समर्थन में बयान दिए हैं, जो इजरायल की जेलों में बंद हैं। नेतन्याहू ने सवाल उठाया कि ऐसी पार्टियों के समर्थन पर निर्भर सरकार देश की सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का सामना कैसे करेगी।

लिकुड के नेतृत्व में राष्ट्रीय सरकार बनाने की अपील

विपक्ष की कोशिशों पर सवाल उठाने के साथ ही नेतन्याहू ने व्यापक राष्ट्रीय सरकार बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस सरकार का नेतृत्व उनकी लिकुड पार्टी करे। इसमें राष्ट्रीय गठबंधन के सभी घटकों के साथ उन जियोनिस्ट पार्टियों को भी शामिल किया जाए, जो सरकार में भागीदारी के लिए तैयार हैं।

नेतन्याहू ने वामपंथी गठबंधन के नेताओं पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ऐसी पार्टियों के समर्थन से अल्पमत सरकार बनाने की कोशिश कर रहा है, जिन्हें वह आतंकवाद का समर्थक मानते हैं। उनके मुताबिक, इस तरह विपक्ष राष्ट्रीय हितों के बजाय राजनीतिक फायदे को प्राथमिकता दे रहा है।

चुनाव में विदेशी दखल की जांच की मांग

नेतन्याहू ने हालिया चुनाव में विदेशी हस्तक्षेप की आशंका भी जताई है। उन्होंने दावा किया कि कुछ विदेशी देशों ने चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने के लिए बड़ी रकम खर्च की हो सकती है। उन्होंने इस मामले की विस्तृत जांच कराने की मांग की।

इससे पहले इजरायल की घरेलू खुफिया एजेंसी शिन बेट ने केंद्रीय चुनाव समिति को कथित तौर पर बताया था कि चुनाव अभियान के दौरान विदेशी फंडिंग और प्रभाव डालने की कोशिशों से जुड़ी जानकारी सामने आई है।

राष्ट्रपति ने शुरू की सरकार गठन की प्रक्रिया

इजरायल में 27 अक्टूबर को हुए चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। ऐसे में अगली सरकार के गठन के लिए राजनीतिक दलों के बीच बातचीत जरूरी हो गई है।

राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने बुधवार, 4 नवंबर को विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और प्रतिनिधियों से मुलाकात शुरू की। दो दिन तक चलने वाली इन बैठकों में वे संसद में सीटें हासिल करने वाले दलों से यह जान रहे हैं कि वे किस नेता को सरकार बनाने की जिम्मेदारी देने की सिफारिश करते हैं।

इसके बाद जिस नेता को सरकार बनाने का मौका मिलेगा, उसे बहुमत जुटाने के लिए अन्य दलों से समर्थन हासिल करना होगा। इस पूरी प्रक्रिया में कई सप्ताह लग सकते हैं।

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