एक खेत की खातिर पूरे गांव के किसानों की मुसीबत बढ़ी, जेसीबी से तुड़वाई स्टाप डेम की पार और बह गया जमा पानी
जानकारी के मुताबिक ग्राम झूलना में मध्यप्रदेश शासन की ओर से किसानों की सिंचाई की सुविधा के लिए शासकीय तालाब पर स्टाप डेम का निर्माण कराया गया था। इस डेम में बारिश के दौरान काफी मात्रा में पानी जमा हुआ था। गांव के किसान इसी पानी का उपयोग अपनी रबी की फसलों की सिंचाई के लिए कर रहे थे। किसानों के लिए यह जलस्रोत काफी महत्वपूर्ण था क्योंकि खेती के इस मौसम में फसलों को समय पर पानी देना जरूरी होता है। ऐसे में डेम की पार टूटने से पूरे गांव के किसानों के सामने सिंचाई का संकट खड़ा होने की आशंका है।
इस मामले में ग्राम झूलना निवासी 36 वर्षीय पवन कुमार धाकड़ ने बदरवास थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने शिकायत में बताया कि पूर्व सरपंच प्रियाचरण धाकड़ का खेत स्टाप डेम के पास स्थित है। उनके खेत की पार भी डेम में बनी हुई थी। आरोप है कि खेत में पानी भर जाने के कारण पूर्व सरपंच ने जेसीबी मशीन से स्टाप डेम की पार तुड़वा दी। इसके बाद तालाब में जमा पानी तेजी से बहने लगा और देखते ही देखते डेम लगभग खाली हो गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस कार्रवाई से केवल एक खेत की समस्या दूर करने के प्रयास में पूरे गांव के किसानों के लिए परेशानी पैदा हो गई।
घटना की जानकारी मिलते ही गांव के लोग मौके पर पहुंचे और विरोध जताया। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी धन से तैयार किए गए जलस्रोत का इस्तेमाल पूरे गांव के किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाता है। ऐसे में किसी एक व्यक्ति की सुविधा के लिए डेम को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं है। किसानों का आरोप है कि पानी बह जाने से उनकी रबी की फसल की सिंचाई प्रभावित हो सकती है। यदि समय पर पानी की व्यवस्था नहीं हुई तो फसलों की पैदावार पर भी असर पड़ने की आशंका है।
मामले की सूचना मिलने पर पटवारी हर्ष ओझा भी घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने मौके का निरीक्षण कर पंचनामा तैयार किया और रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को भेजने की बात कही। वहीं शिकायतकर्ता पवन कुमार धाकड़ ने पुलिस से पूर्व सरपंच के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और सरकारी जल संरचना को नुकसान पहुंचाने की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
फिलहाल बदरवास पुलिस शिकायत के आधार पर मामले की जांच कर रही है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि स्टाप डेम की पार किन परिस्थितियों में और किसके निर्देश पर तोड़ी गई। इस घटना ने गांव में सिंचाई के पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। किसानों को अब प्रशासन से उम्मीद है कि मामले में जल्द कार्रवाई होगी और भविष्य में इस तरह की घटना रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
