मध्यप्रदेश में सफाई व्यवस्था पर मंडराया संकट, भोपाल में जुटे सफाईकर्मी, मांगें पूरी नहीं हुईं तो अनिश्चितकालीन हड़ताल
यह प्रदेशव्यापी आंदोलन अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन 7262 के बैनर तले किया जा रहा है। यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष मगनलाल झांझोट ने बताया कि आंदोलन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से हजारों सफाई कर्मचारी और दूसरे कर्मचारी वर्ग के लोग शामिल हुए हैं। नीलम पार्क में धरना देकर कर्मचारी सरकार तक अपनी बात पहुंचाना चाहते हैं। उनका कहना है कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा बल्कि मांगों पर ठोस निर्णय लिया जाना चाहिए। कर्मचारियों ने वेतन बढ़ाने और लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारियों को स्थायी करने सहित अन्य मांगें उठाई हैं।
सफाईकर्मियों का आरोप है कि अपनी समस्याओं को लेकर वे पहले भी कई बार प्रदर्शन कर चुके हैं। अक्टूबर महीने में भी कर्मचारियों ने आंदोलन किया था। इसके बावजूद उनकी मांगों का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। इसी वजह से अब यूनियन ने आंदोलन को प्रदेशव्यापी रूप देने का फैसला किया है। कर्मचारियों का कहना है कि वे शहरों और कस्बों की सफाई व्यवस्था को सुचारु रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं लेकिन उनकी आर्थिक और सेवा संबंधी समस्याओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वेतन में बढ़ोतरी और नौकरी की स्थिरता उनके लिए सबसे अहम मुद्दे हैं।
प्रदेश अध्यक्ष मगनलाल झांझोट ने कहा है कि मंगलवार को होने वाले धरना प्रदर्शन के दौरान यदि सरकार की ओर से सकारात्मक निर्णय लिया जाता है तो आंदोलन को लेकर आगे विचार किया जा सकता है। लेकिन मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में 4 नवंबर से प्रदेश के सभी नगरीय निकायों के कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। यूनियन ने इसे आर-पार की लड़ाई बताते हुए कर्मचारियों से आंदोलन में एकजुट रहने की अपील की है। यदि हड़ताल शुरू होती है तो नगर निगमों और नगर पालिकाओं की नियमित सफाई सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि हड़ताल शुरू होने और उसके प्रभाव को लेकर स्थिति सरकार के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी।
इस आंदोलन के बीच सरकारी कचरा गाड़ियों से किए गए प्रचार को लेकर भी विवाद सामने आया है। जानकारी के अनुसार सोमवार को कचरा गाड़ियों पर लगे लाउडस्पीकर के माध्यम से धरना प्रदर्शन का अनाउंसमेंट किया गया था। इस संबंध में शिकायत नगर निगम के अधिकारियों तक पहुंची है। बताया गया कि आंदोलन एक कर्मचारी यूनियन की ओर से किया जा रहा है और सरकारी कचरा गाड़ियों के लाउडस्पीकर का इस्तेमाल इसके प्रचार के लिए किए जाने पर आपत्ति जताई गई है। फिलहाल सफाईकर्मियों का मुख्य जोर अपनी मांगों पर सरकार से फैसला कराने पर है। अब देखना होगा कि सरकार और संबंधित निकायों की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं और क्या बातचीत के जरिए हड़ताल टल पाती है या प्रदेशभर में सफाई व्यवस्था पर इसका असर देखने को मिलता है।
