November 3, 2026

चेन्नई बना वेयरहाउसिंग का नया हॉटस्पॉट, पुणे में भी 245 प्रतिशत की उछाल, निवेशकों का बढ़ा भरोसा

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नई दिल्ली। भारत में वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है। मजबूत औद्योगिक मांग और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों में आई तेजी के कारण इस सेक्टर ने वर्ष 2026 में शानदार प्रदर्शन दर्ज किया है। देश में वेयरहाउस की जगह किराए पर लेने यानी लीजिंग की मांग पिछले तीन वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। वेस्टियन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार जुलाई से सितंबर 2026 की तिमाही में देशभर में 1.058 करोड़ वर्गफुट वेयरहाउस स्पेस का अवशोषण दर्ज किया गया। वहीं वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में कुल लीजिंग बढ़कर 3.26 करोड़ वर्गफुट तक पहुंच गई। यह आंकड़ा पिछले तीन वर्षों में सबसे अधिक है।

रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत के वेयरहाउसिंग बाजार में मांग मजबूत बनी हुई है। जुलाई से सितंबर की तिमाही में लीजिंग गतिविधियों में पिछली तिमाही के मुकाबले 0.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं सालाना आधार पर यह बढ़ोतरी 15 प्रतिशत रही। इससे संकेत मिलता है कि देश में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के साथ भंडारण और माल परिवहन से जुड़ी आधुनिक सुविधाओं की जरूरत लगातार बढ़ रही है।

इस क्षेत्र में निवेशकों की दिलचस्पी भी तेजी से बढ़ी है। रिपोर्ट के अनुसार 2026 की तीसरी तिमाही के दौरान वेयरहाउसिंग सेक्टर को 33.2 करोड़ डॉलर का संस्थागत निवेश प्राप्त हुआ। यह इस तिमाही में कुल संस्थागत निवेश का लगभग 17 प्रतिशत हिस्सा रहा। खास बात यह है कि पिछले दो वर्षों में किसी एक तिमाही के दौरान वेयरहाउसिंग क्षेत्र में हुआ यह सबसे ऊंचा निवेश स्तर है। बढ़ती खपत विनिर्माण गतिविधियों का विस्तार और आधुनिक लॉजिस्टिक्स सुविधाओं की जरूरत इस निवेश के प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।

वेस्टियन के सीईओ श्रीनिवास राव के अनुसार भारत का वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र अब पारंपरिक मांग के स्रोतों से आगे बढ़ रहा है। पहले इस क्षेत्र में थर्ड पार्टी लॉजिस्टिक्स यानी 3पीएल कंपनियों की भूमिका प्रमुख रहती थी लेकिन अब मैन्युफैक्चरिंग इंजीनियरिंग और ऑटोमोबाइल उद्योगों की भागीदारी भी तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि मजबूत मांग बेहतर होते बुनियादी ढांचे और सरकारी नीतिगत समर्थन से इस क्षेत्र की दीर्घकालिक संभावनाएं मजबूत हो रही हैं।

सेक्टर के अलग-अलग हिस्सों की बात करें तो थर्ड पार्टी लॉजिस्टिक्स कंपनियां तीसरी तिमाही में भी वेयरहाउस स्पेस की सबसे बड़ी ग्राहक बनी रहीं। हालांकि कुल लीजिंग में उनकी हिस्सेदारी पिछली तिमाही के 41 प्रतिशत से घटकर 29 प्रतिशत रह गई। इसके बावजूद यह सबसे बड़ा लीजिंग सेगमेंट रहा। इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की हिस्सेदारी 23 प्रतिशत दर्ज की गई जबकि ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स उद्योग ने कुल लीजिंग में 14 प्रतिशत योगदान दिया।

शहरों के प्रदर्शन में चेन्नई सबसे आगे रहा। यहां तीसरी तिमाही के दौरान 28.9 लाख वर्गफुट वेयरहाउस स्पेस की लीजिंग हुई। यह पिछली तिमाही के मुकाबले 320 प्रतिशत और पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 156 प्रतिशत अधिक है। मुंबई 27 लाख वर्गफुट लीजिंग के साथ दूसरे स्थान पर रहा। हालांकि यहां तिमाही आधार पर 46 प्रतिशत और सालाना आधार पर 37 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। पुणे ने 22 लाख वर्गफुट के अवशोषण के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। यहां सालाना आधार पर लीजिंग में 245 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

रिपोर्ट का अनुमान है कि आने वाले समय में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार और आधुनिक भंडारण सुविधाओं की बढ़ती जरूरत से वेयरहाउसिंग क्षेत्र को और मजबूती मिलेगी। तकनीक आधारित वेयरहाउस और बेहतर लॉजिस्टिक्स नेटवर्क की मांग बढ़ने से स्थापित औद्योगिक केंद्रों के साथ नए उभरते शहरों को भी फायदा मिल सकता है। भारत में बढ़ता निवेश और मजबूत होती औद्योगिक मांग इस सेक्टर को आने वाले वर्षों में विकास का महत्वपूर्ण आधार बना सकती है।

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