रियाज मंजिल पर किसका हक, आफताब जहां के स्वामित्व पर आपत्ति, 2024 के शत्रु संपत्ति प्रमाण-पत्र की भी होगी जांच
खानूगांव स्थित ऐतिहासिक रियाज मंजिल कोठी के साथ खसरा नंबर 42 के स्वामित्व को लेकर मुख्य विवाद सामने आया है। आपत्तिकर्ताओं का कहना है कि उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड में यह जमीन आफताब जहां बेगम के नाम दर्ज नहीं है। उनके अनुसार रिकॉर्ड में इसका संबंध नवाब हमीदुल्लाह खान और बाद में उनकी उत्तराधिकारी नवाब बेगम साजिदा सुल्तान से बताया गया है। ऐसे में केवल किसी व्यक्ति के संपत्ति में रहने के आधार पर उसके कानूनी स्वामित्व को तय नहीं किया जा सकता। इसके लिए पुराने दस्तावेज और सरकारी रिकॉर्ड देखना जरूरी है।
आपत्तियों में वर्ष 2020 की राजस्व जांच का भी उल्लेख किया गया है। दावा है कि तत्कालीन तहसीलदार संत हिरदाराम नगर ने खसरा नंबर 42 से संबंधित राजस्व प्रकरण में जांच की थी। इस जांच में आफताब जहां के पक्ष में कथित हिबा या दान के आधार पर किए गए नामांतरण के दावे को सिद्ध नहीं माना गया था। अब इसी बिंदु को आधार बनाकर सवाल उठाया गया है कि यदि पिछली राजस्व जांच में उनका मालिकाना हक स्थापित नहीं हुआ था तो वर्ष 2024 में इसी संपत्ति को उनके स्वामित्व वाली मानकर शत्रु संपत्ति घोषित करने का आधार क्या था।
मामले में 29 अप्रैल 2024 को जारी बताए जा रहे शत्रु संपत्ति प्रमाण-पत्र की प्रामाणिकता और उसे जारी करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। आपत्तिकर्ताओं ने इसे सीधे फर्जी नहीं बताया है बल्कि इसकी मूल फाइल और उससे जुड़े दस्तावेज बुलाने की मांग की है। इसके लिए भारत के शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय से संबंधित मूल या प्रमाणित रिकॉर्ड मंगाने की मांग की गई है। इसमें नोटशीट अनुमोदन आदेश संपत्ति सत्यापन रिपोर्ट स्वामित्व का आधार और केंद्र तथा राज्य के बीच हुए पत्राचार को शामिल करने की मांग की गई है।
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि रियाज मंजिल और खसरा नंबर 42 का वास्तविक कानूनी स्वामित्व किसके पास था। साथ ही यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि आफताब जहां बेगम के स्वामित्व का आधार क्या था और वर्ष 2024 में जारी प्रमाण-पत्र किन दस्तावेजों और जांच के आधार पर तैयार किया गया।
नवाबी संपत्तियों का विवाद केवल रियाज मंजिल तक सीमित नहीं है। भोपाल के अंतिम नवाब हमीदुल्लाह खान की संपत्तियों को लेकर सैफ अली खान और उनके परिवार के साथ नवाब की तीसरी बेटी राबिया सुल्तान के वारिसों की ओर से भी दावे किए गए हैं। संपत्तियों की जांच और सत्यापन के लिए सात सदस्यीय समिति गठित की गई है। बैरागढ़ टीटी नगर कोलार हुजूर और गोविंदपुरा के एसडीएम अलग अलग क्षेत्रों में भूमि रिकॉर्ड का सर्वेक्षण और सत्यापन कर रहे हैं।
विवाद का एक प्रमुख पक्ष शत्रु संपत्ति से भी जुड़ा है। केंद्र सरकार की ओर से पूर्व नवाब की कुछ संपत्तियों को शत्रु संपत्ति माना गया है। इसके पीछे यह तर्क दिया गया है कि नवाब की बड़ी बेटी आबिदा सुल्तान विभाजन के समय पाकिस्तान चली गई थीं। वहीं सैफ अली खान पटौदी और उनके परिवार की ओर से दावा किया गया है कि उनकी दादी साजिदा सुल्तान वास्तविक उत्तराधिकारी थीं। इस बीच राबिया सुल्तान के वारिसों ने भी अदालत में संपत्तियों के बंटवारे की मांग की है। अब एसडीएम कोर्ट की सुनवाई में सामने आने वाले पुराने रिकॉर्ड इस विवाद को समझने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
