RDVV जबलपुर में कुलसचिव की कुर्सी पर नहीं टिक रहा कोई, 33 महीने में 6 बदलाव, अब डीके बग्गा की होगी एंट्री
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय से पांच जिलों के करीब 163 कॉलेज जुड़े हुए हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था में कुलसचिव का पद महत्वपूर्ण माना जाता है। लगातार बदलाव के कारण प्रशासनिक कामकाज में स्थायित्व को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सोमवार को डॉ. रविशंकर सोनवाल के कार्यमुक्त होने के बाद कुलगुरु के आदेश पर प्रोफेसर एसएस संधू को प्रभारी कुलसचिव बनाया गया था। हालांकि देर रात भोपाल से उच्च शिक्षा विभाग का आदेश आने के बाद यह व्यवस्था भी अस्थायी साबित हुई और डीके बग्गा को नया कुलसचिव नियुक्त कर दिया गया।
पिछले करीब पौने तीन साल में प्रोफेसर रश्मि टंडन डॉ. संतोष जाटव डॉ. रत्नेश कुरलिया आरएस बघेल प्रोफेसर सुरेंद्र सिंह और डॉ. रविशंकर सोनवाल कुलसचिव की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इनमें आरएस बघेल की नियुक्ति शासन स्तर पर कुलसचिव के तौर पर हुई थी। उन्होंने करीब 11 महीने तक पद संभाला और इसके बाद सेवानिवृत्त हो गए। वहीं डॉ. रत्नेश कुरलिया को शासन की ओर से अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। अब नए कुलसचिव के रूप में डीके बग्गा की नियुक्ति हुई है।
विश्वविद्यालय की स्थिति को लेकर एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। यहां करीब छह हजार सीटें हैं और 29 से ज्यादा विभाग संचालित हो रहे हैं लेकिन नियमित प्राध्यापकों की संख्या महज 16 बताई जा रही है। विश्वविद्यालय में प्राध्यापकों के 156 पद स्वीकृत हैं। कई विभागों में नियमित शिक्षक नहीं होने के बावजूद शैक्षणिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। ऐसे में नियमित शिक्षकों को प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपे जाने से अकादमिक और शोध कार्य प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
विश्वविद्यालय में उपकुलसचिव के अलावा तीन असिस्टेंट रजिस्ट्रार फाइनेंस कंट्रोलर और परीक्षा नियंत्रक जैसे पद भी मौजूद हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक जिम्मेदारियों के लिए शिक्षकों की सेवाएं लेने का मामला सामने आया है। छात्रों का कहना है कि कुलसचिव की जिम्मेदारी बार बार बदलने से विश्वविद्यालय के कामकाज पर असर पड़ रहा है। परीक्षा और परिणामों को लेकर भी लगातार शिकायतें सामने आने की बात कही गई है। ऐसे में प्रशासनिक नेतृत्व में स्थायित्व को लेकर चिंता बढ़ रही है।
इस बीच पूर्व कुलसचिव डॉ. रविशंकर सोनवाल का चार दिन पहले गुना तबादला किया गया है। इससे पहले उन्होंने कुलगुरु और राज्यपाल को पत्र लिखकर विश्वविद्यालय में काम करने के माहौल को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने खुद और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर आशंका जताते हुए सुरक्षा की मांग की थी। उनका कहना था कि एक कर्मचारी को निलंबित करने के बाद उनके खिलाफ षड्यंत्र रचे जाने की आशंका है।
अब विश्वविद्यालय में नए कुलसचिव डीके बग्गा के कार्यभार संभालने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था किस तरह आगे बढ़ती है इस पर नजर रहेगी। साथ ही शिक्षकों के रिक्त पद भरने की प्रक्रिया और परीक्षा परिणाम से जुड़े मामलों में सुधार को लेकर भी विश्वविद्यालय के अगले कदम महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
