September 17, 2026

100 से ज्यादा ग्रामीण रोज बना रहे अपनी सड़क 40 साल पहले उजड़े गांव में अब भी नहीं पहुंची पक्की सड़क

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जबलपुर । ज्जबलपुर जिले के दुर्गानगर गांव में सड़क की समस्या ने ग्रामीणों को इस कदर परेशान कर दिया कि अब उन्होंने सरकारी मदद का इंतजार छोड़कर खुद सड़क सुधारने का फैसला किया है। करीब 40 साल पहले बरगी बांध परियोजना के लिए अपना घर बार छोड़कर यहां बसे ग्रामीण आज अपने गांव की करीब 2 किलोमीटर सड़क बनाने के लिए गैंती फावड़ा और तसला उठा रहे हैं। गांव के 100 से ज्यादा महिला पुरुष बच्चे और दिव्यांग रोज सुबह श्रमदान कर सड़क को बारिश में चलने लायक बनाने में जुटे हैं। ग्रामीण अपने स्तर पर मुरम और पत्थर की व्यवस्था कर रास्ते में डाल रहे हैं।

जबलपुर मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर दूर शहपुरा जनपद के दुर्गानगर में बड़ी संख्या में परिवार रहते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक गांव की मुख्य सड़क बारिश शुरू होते ही कीचड़ में बदल जाती है। कई बार रास्ता इतना खराब हो जाता है कि गांव का संपर्क आसपास के इलाकों से प्रभावित हो जाता है। इसका सबसे ज्यादा असर स्कूल जाने वाले बच्चों मरीजों और बुजुर्गों पर पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में जरूरी काम के लिए गांव से बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाता है।

सड़क की बदहाली का गंभीर असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार खराब रास्ते के कारण कई बार एंबुलेंस और 108 वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाते। प्रसव के नजदीक पहुंचने पर गर्भवती महिलाओं को दूसरे गांव में जाकर रहने की मजबूरी होती है ताकि जरूरत पड़ने पर समय पर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की समस्या केवल आने जाने की परेशानी नहीं बल्कि उनके लिए स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन चुकी है।

दुर्गानगर के ग्रामीण बताते हैं कि वे लंबे समय से प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से सड़क निर्माण की मांग करते आ रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार कई बार आवेदन देने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जिला पंचायत की बैठकों में भी सड़क का मुद्दा कई बार उठाया गया। जिला पंचायत सीईओ को लिखित प्रस्ताव देने की बात भी ग्रामीणों ने कही है। इसके बावजूद सड़क का काम शुरू नहीं होने पर लोगों का धैर्य जवाब दे गया और उन्होंने खुद रास्ता सुधारने का निर्णय लिया।

ग्रामीण भीमा बाई के मुताबिक सड़क की जरूरत इतनी ज्यादा है कि अब गांव के लोगों को इसे खुद ही बनाने के लिए आगे आना पड़ा। गांव के कई लोग मजदूरी करके अपना परिवार चलाते हैं। इसके बावजूद वे रोज सुबह मजदूरी पर जाने से पहले करीब दो से तीन घंटे सड़क सुधारने में लगा रहे हैं। पहले सड़क पर काम किया जाता है और इसके बाद लोग रोजी रोटी कमाने के लिए निकलते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई वर्षों में स्थानीय विधायक से लेकर जिला पंचायत सीईओ और कलेक्टर तक सड़क निर्माण के लिए आवेदन दिए गए। जनसुनवाई में भी समस्या रखी गई लेकिन हर बार निरीक्षण और जल्द कार्रवाई का आश्वासन ही मिला। ग्रामीणों के मुताबिक बारिश के दौरान बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है क्योंकि खराब रास्ते के कारण उनका स्कूल जाना मुश्किल हो जाता है।

मामला सामने आने के बाद बरगी विधायक नीरज सिंह ने ग्रामीणों की परेशानी को गंभीर बताया है। उन्होंने अधिकारियों से चर्चा कर सड़क निर्माण के लिए बजट का प्रावधान कराने की बात कही है। जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गहलोत ने भी मामले की जानकारी होने की बात कही और ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए जल्द सड़क बनाने का प्रयास करने की बात कही है।

फिलहाल दुर्गानगर के ग्रामीण अपने श्रम और संसाधनों से रास्ता सुधार रहे हैं। जिन लोगों ने चार दशक पहले विकास परियोजना के लिए अपना घर गांव और जमीन छोड़ी थी वे आज भी बुनियादी सड़क सुविधा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों की मेहनत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि जरूरी सुविधाओं के लिए आखिर उन्हें कितने वर्षों तक इंतजार करना पड़ेगा।

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