यमन और सऊदी अरब में हूती हमलों से बढ़ा तनाव, 58 सैनिकों की मौत के बाद मिडिल ईस्ट में युद्ध का खतरा गहराया
यमन के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला किया गया। हमले में बड़ी संख्या में सैनिक हताहत हुए। अधिकारियों ने कहा है कि इस कार्रवाई का जवाब उचित समय पर दिया जाएगा। सैन्य ठिकानों पर हुए हमले ने यमन में लंबे समय से जारी संघर्ष को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।
इसी बीच सऊदी अरब के नजरान शहर में भी हमला हुआ। यहां 11 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। घायलों में सऊदी अरब के नागरिकों के साथ यमन, मिस्र और पाकिस्तान के नागरिक भी शामिल बताए गए हैं। घायलों में चार साल का एक बच्चा भी बताया गया है। हमले के बाद कुछ स्थानों पर आग लग गई, जिसके बाद बचाव दलों ने मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव अभियान चलाया।
यमन और सऊदी अरब में लगभग एक ही समय पर सामने आई इन घटनाओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खासतौर पर मिसाइल और ड्रोन के इस्तेमाल से यह आशंका पैदा हुई है कि संघर्ष का दायरा आगे और बढ़ सकता है। यदि इस तरह के हमले जारी रहते हैं तो इसका असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहने की संभावना है।
मध्य पूर्व में तनाव ऐसे समय बढ़ रहा है जब महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को लेकर भी स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब-अल-मंदेब जैसे प्रमुख समुद्री रास्तों से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति जुड़ी हुई है। इन मार्गों पर जहाजों की आवाजाही कम होने की खबरों ने वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ाई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की चर्चाओं के बीच क्षेत्रीय घटनाक्रम पर भी नजर बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ने के संकेत दिए जाने के बावजूद क्षेत्र में सैन्य तनाव कम होता नजर नहीं आ रहा है। समुद्री मार्गों पर किसी नए शुल्क या सुरक्षा संकट की स्थिति में परिवहन लागत बढ़ सकती है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ सकता है।
इसी दौरान लेबनान में हुए एक धमाके में दो इजराइली सैनिकों की मौत की जानकारी भी सामने आई है। अलग-अलग इलाकों में सामने आ रही ऐसी घटनाएं मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति को और जटिल बना रही हैं। एक मोर्चे पर तनाव कम होने की उम्मीद के बीच दूसरे क्षेत्र में हिंसा बढ़ने से स्थायी शांति की कोशिशों को चुनौती मिल रही है।
हूती संगठन यमन का एक सशस्त्र विद्रोही संगठन है, जो लंबे समय से यमन की सरकार और सऊदी समर्थित गठबंधन के खिलाफ संघर्ष करता रहा है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का आरोप है कि ईरान हूतियों को हथियार और सैन्य सहायता उपलब्ध कराता है। इसी वजह से हूती गतिविधियों को ईरान और क्षेत्रीय शक्तियों के बीच व्यापक तनाव से जोड़कर देखा जाता है।
माना जाता है कि क्षेत्र में किसी एक पक्ष पर सैन्य या राजनीतिक दबाव बढ़ने पर दूसरे मोर्चों पर गतिविधियां तेज हो सकती हैं। ताजा हमलों ने इसी आशंका को फिर मजबूत किया है। यमन और सऊदी अरब में हुए हमलों के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती तनाव को और फैलने से रोकना है। आने वाले दिनों में सैन्य जवाब, समुद्री मार्गों की स्थिति और अमेरिका-ईरान बातचीत का असर पूरे मध्य पूर्व के घटनाक्रम पर पड़ सकता है।
