उत्तराखंड की सियासत: विश्लेषकों का बड़ा दावा- यह ‘मास्टरस्ट्रोक’ BJP को दिला सकता है ऐतिहासिक जीत
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उत्तराखंड की सियासत में हल्द्वानी सीट बनाएगी ‘Win-Win’ स्थिति (Situation)
देहरादून/हल्द्वानी। उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों में आगामी चुनावों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। कुमाऊं क्षेत्र की दो बेहद अहम सीटों – हल्द्वानी और कालाढूंगी – को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों और जानकारों ने एक बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि भारतीय जनता पार्टी (BJP) एक सोची-समझी रणनीति के तहत अपने वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत को हल्द्वानी विधानसभा सीट से मैदान में उतारती है, तो पार्टी न केवल हल्द्वानी में परचम फहरा सकती है, बल्कि पूरे कुमाऊं क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और विशाल जीत हासिल कर सकती है।
पुराने ढर्रे पर खतरा: कालाढूंगी से फिर चुनाव लड़ने पर BJP को हो सकता है भारी नुकसान
राजनीतिक विश्लेषकों के अलावा पुराने भाजपाई जो जनसंघ के जमाने से पार्टी से जुड़े हैं, उनका सीधा गणित है कि यदि भाजपा सामान्य ढर्रे पर चलते हुए बंशीधर भगत को दोबारा कालाढूंगी से ही मैदान में उतारती है, तो पार्टी के लिए 2027 में स्थितियां बेहद विकट हो सकती हैं:
कालाढूंगी में सीट गंवाने का जोखिम: कालाढूंगी में बंशीधर भगत के प्रति स्थानीय स्तर पर जो अत्यधिक विरोध और जन-असंतोष देखा जा रहा है, उसके चलते इस बात की पूरी संभावना है कि यह सीट भाजपा के हाथ से निकल जाएगी।
दोहरा नुकसान और प्रदेश स्तर पर नकारात्मक असर: यदि भगत कालाढूंगी से हारते हैं, तो भाजपा कालाढूंगी तो खोएगी ही, साथ ही हल्द्वानी सीट भी उसके हाथ से जाएगी। इतना ही नहीं, वरिष्ठ नेता को दोबारा उससे नाराज जनता के सामने ही उतारना न केवल कालाढूंगी अपितु पूरे प्रदेश में पार्टी को लेकर नकारातमक छवि का निर्माण हो सकता है। कारण के संबंध में कहा जा रहा है कि जब जिस नेता से जनता नाराज है उसे पुन: मैदान में उतारा जाएगा तो जनता न केवल खुद उसे वोट देने से दूरी बनाएगी बल्कि विभिन्न जगहों पर रह रहे अपने रिश्ते नातेदारों के सामने भी ये बातें जाहिर करेगी, जिससे पूरे उत्तराखंड में भाजपा के लिए नकारात्मक प्रभाव सामने आएगा।
वहीं यदि चुनाव के बाद यदि नेता की हार होती है तो भी एक नकारात्मक संदेश पूरे प्रदेश में जाएगा, जिससे भाजपा को साल 2029 के लोकसभा चुनावों में भी बड़ा सियासी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
नया समीकरण: जो भाजपा के लिए बनाएगा ‘Win-Win’ स्थिति (Situation)- हल्द्वानी बदलेगा BJP की किस्मत?
विश्लेषकों के अनुसार, इस महा-रणनीति के अनुसार, बीजेपी अपने वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत को कालाढूंगी के बजाय हल्द्वानी सीट से मैदान में उतारने की तैयारी करनी चाहिए। ऐसा में यदि बीजेपी बंशीधर भगत को हल्द्वानी सीट से उम्मीदवार बनाती है, तो यह पार्टी के लिए सबसे सकारात्मक और ‘Win-Win’ फॉर्मूला साबित होगा:
: हल्द्वानी में आसान जीत: बंशीधर भगत का हल्द्वानी में अपना एक बड़ा राजनीतिक प्रभाव और पुराना जनाधार रहा है। वह इस सीट पर कांग्रेस के मजबूत किले को ध्वस्त करने की क्षमता रखते हैं।
ज्ञात हो हल्द्वानी सीट लंबे समय से कांग्रेस का गढ़ मानी जाती रही है, जहां कभी दिवंगत दिग्गज नेता इंदिरा हृदयेश का कब्जा था। लेकिन आंकड़े गवाह हैं कि इस सीट पर केवल बंशीधर भगत ही वह चेहरा रहे हैं, जिन्होंने अतीत में इंदिरा हृदयेश जैसी कद्दावर नेता को पटखनी दी थी।
: कालाढूंगी में विरोध समाप्त और संपूर्ण एकजुटता: भगत को हल्द्वानी भेजकर जब भाजपा कालाढूंगी से किसी नए चेहरे को टिकट देगी, तो स्थानीय जनता का विरोध पूरी तरह शांत हो जाएगा। चूंकि भगत को हल्द्वानी जैसी महत्वपूर्ण सीट देकर संतुष्ट कर दिया गया होगा, इसलिए उनका खेमा भी किसी फैसले से नाराज नहीं होगा। साथ ही उनके समर्थक जो कालाढूंगी में हैं वे भी पार्टी द्वारा चुने गए नए नेता का दिल से समर्थन करेंगे।
(इसके साथ ही दरअसल कालाढूंगी विधानसभा क्षेत्र में वर्तमान विधायक होने के नाते बंशीधर भगत को लेकर स्थानीय स्तर पर जनता के बीच नाराजगी और विरोध बना हुआ है। ऐसे में यदि पार्टी भगत को हल्द्वानी शिफ्ट करती है, तो कालाढूंगी में वर्षों से बना यह स्थानीय विरोध अपने आप शांत हो जाएगा।
दूसरा हल्द्वानी में बंशीधर भगत का जनाधार और उनका राजनीतिक प्रभाव इस तरह के स्थानीय विरोध से पूरी तरह अप्रभावित रहेगा।)
: समर्थकों का पूरा सहयोग: कालाढूंगी में बंशीधर भगत के जितने भी समर्थक और कार्यकर्ता हैं, वे भी पार्टी के इस फैसले का स्वागत करते हुए भाजपा द्वारा उतारे गए नए उम्मीदवार का खुलकर समर्थन करेंगे।
: दोनों सीटों पर शानदार बढ़त: इस आपसी तालमेल और एकजुटता के चलते भाजपा न केवल हल्द्वानी जीतेगी, बल्कि कालाढूंगी सीट को भी एक बड़े अंतर और शानदार बढ़त के साथ अपनी झोली में डाल लेगी।
राजनीतिक के जानकारों के अनुसार यदि भाजपा यह साहसिक और रणनीतिक फैसला लेती है, तो इसका प्रदेश की राजनीति पर बेहद सकारात्मक और अनुकूल प्रभाव पड़ेगा। यह न केवल कुमाऊं मंडल में कार्यकर्ताओं में नया जोश भरेगा, बल्कि भाजपा को एक विशाल और अप्रत्याशित चुनावी जीत की ओर ले जाएगा। अब देखना यह है कि पार्टी हाईकमान जानकारों के इस जमीनी गणित पर कितनी जल्दी मुहर लगाता है।
