शनिवार के उपाय और सावधानियां, शनि पूजा के इन नियमों से चमक सकती है किस्मत
शनिवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ काले या गहरे नीले रंग के वस्त्र धारण करें। पूजा से पहले भगवान गणेश का स्मरण करें और फिर शनि देव की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं। तिल के तेल का दीपक जलाना विशेष शुभ माना जाता है। इसके बाद काले तिल सरसों का तेल उड़द की दाल और नीले या काले पुष्प अर्पित करें। श्रद्धा के साथ शनि मंत्र अथवा शनि स्तोत्र का पाठ करें। हनुमान चालीसा का पाठ भी शनिवार के दिन विशेष लाभदायक माना जाता है क्योंकि भगवान हनुमान की कृपा से शनि दोष का प्रभाव कम होने की मान्यता है।
शनि पूजा के दौरान संयम और सादगी का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करना गरीबों को भोजन कराना काले तिल कंबल या लोहे का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। शनि देव कर्म और न्याय के प्रतीक हैं इसलिए ईमानदारी सत्य और अनुशासन का पालन करना भी उनकी आराधना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
शनिवार के दिन कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। किसी का अपमान करने झूठ बोलने क्रोध करने या किसी को कष्ट पहुंचाने से बचना चाहिए। बिना वजह पेड़ पौधों को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए और पशु पक्षियों के प्रति भी दया का भाव रखना चाहिए। कई लोग इस दिन पीपल के वृक्ष के नीचे तिल के तेल का दीपक जलाते हैं और उसकी परिक्रमा करते हैं जिसे शुभ माना जाता है।
जिन लोगों की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती ढैया या शनि से जुड़ी अन्य स्थितियां चल रही हों उनके लिए शनिवार का व्रत और नियमित पूजा लाभकारी मानी जाती है। हालांकि किसी भी ज्योतिषीय उपाय को अपनाने से पहले योग्य विद्वान की सलाह लेना बेहतर माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनि देव केवल दंड देने वाले देवता नहीं बल्कि कर्म के अनुसार न्याय करने वाले देव हैं। इसलिए यदि व्यक्ति अच्छे कर्म करता है दूसरों की मदद करता है और जीवन में ईमानदारी बनाए रखता है तो शनि देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। श्रद्धा भक्ति और सकारात्मक सोच के साथ किए गए पूजा पाठ का फल भी अधिक शुभ माना जाता है।
