October 1, 2026

गुरुवार व्रत में भूलकर भी न करें ये गलतियां पूजा से लेकर व्रत खोलने तक जानें पूरी विधि और जरूरी नियम

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नई दिल्ली। गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरुवार के दिन श्रद्धा और नियम के साथ व्रत और पूजा करने से जीवन में सुख शांति समृद्धि और सौभाग्य की कामना की जाती है। माना जाता है कि बृहस्पति ग्रह से जुड़े दोषों को शांत करने और भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए गुरुवार का व्रत किया जाता है। अगर आप भी गुरुवार का व्रत रखने जा रहे हैं तो पूजा की सही विधि और व्रत के नियमों को जानना जरूरी है।

गुरुवार व्रत के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद साफ और संभव हो तो पीले रंग के वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को साफ करने के बाद भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। इसके साथ ही देवगुरु बृहस्पति का ध्यान करें। पूजा के लिए पीले फूल पीला चंदन हल्दी केले और पीली मिठाई जैसी सामग्री रखी जा सकती है। भगवान विष्णु को पीले रंग की वस्तुएं अर्पित करना शुभ माना जाता है।

पूजा शुरू करने से पहले भगवान विष्णु और बृहस्पति देव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान विष्णु को जल अर्पित करें और पूजा सामग्री चढ़ाएं। घी का दीपक जलाकर भगवान विष्णु की आरती करें। इस दौरान विष्णु मंत्र का जाप किया जा सकता है। बृहस्पति देव की कृपा के लिए ॐ बृं बृहस्पतये नमः मंत्र का जाप भी श्रद्धानुसार किया जा सकता है। पूजा के दौरान भगवान विष्णु की कथा सुनना या पढ़ना भी शुभ माना जाता है।

गुरुवार के व्रत में भोजन को लेकर अलग अलग परंपराएं देखने को मिलती हैं। कुछ लोग पूरे दिन फलाहार करते हैं जबकि कुछ लोग दिन में एक बार सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। व्रत की परंपरा के अनुसार भोजन में पीली चीजों जैसे केले चने की दाल या बेसन से बने सात्विक पकवान को शामिल किया जा सकता है। नमक और अन्य खाद्य पदार्थों को लेकर भी अलग अलग धार्मिक मान्यताएं हैं इसलिए अपने परिवार की परंपरा के अनुसार व्रत रखना उचित माना जाता है।

गुरुवार के दिन दान का भी विशेष महत्व माना जाता है। सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को पीले वस्त्र चने की दाल गुड़ केले या अन्य उपयोगी सामग्री का दान किया जा सकता है। कुछ परंपराओं में केले के पेड़ की पूजा करने की भी मान्यता है। हालांकि पूजा की विधि और नियम क्षेत्र तथा परिवार की परंपरा के अनुसार अलग हो सकते हैं।

गुरुवार व्रत के दौरान मन और वाणी की शुद्धता पर भी ध्यान देना चाहिए। किसी का अपमान करने झूठ बोलने या अनावश्यक विवाद करने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं में इस दिन सात्विक जीवनशैली अपनाने और भगवान विष्णु का स्मरण करने को महत्व दिया जाता है। व्रत का उद्देश्य केवल भोजन का त्याग करना नहीं बल्कि संयम श्रद्धा और सकारात्मक आचरण के साथ दिन बिताना भी माना जाता है।

अगर किसी व्यक्ति ने गुरुवार के व्रत की निश्चित संख्या का संकल्प लिया है तो निर्धारित व्रत पूरे होने के बाद अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार उद्यापन किया जा सकता है। उद्यापन में भगवान विष्णु की विधिवत पूजा कथा आरती और सामर्थ्य के अनुसार दान किया जाता है। इस तरह श्रद्धा और नियमपूर्वक गुरुवार का व्रत पूरा किया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी इन बातों को आस्था के रूप में लेना चाहिए और पूजा की विधि अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार अपनानी चाहिए।

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