अमेरिका के 50 प्रतिशत नए टैरिफ से बढ़ा व्यापारिक तनाव, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने बातचीत की पेशकश कर समाधान पर दिया जोर
मार्क कार्नी ने कहा कि अमेरिका की ओर से प्रस्तावित नया शुल्क हाल के वर्षों में अपनाई गई एकतरफा व्यापारिक नीतियों की श्रृंखला का हिस्सा है। उनका कहना है कि यह कदम कनाडा-अमेरिका-मेक्सिको व्यापार समझौते की भावना के विपरीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि कनाडा के ऑटोमोबाइल क्षेत्र सहित कई उद्योगों पर लगाए गए शुल्क मुक्त व्यापार व्यवस्था को प्रभावित करते हैं और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं।
कनाडाई प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने अब तक हर कदम अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों और अपने अधिकारों के अनुरूप उठाया है। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न प्रांत, उद्योग, किसान, कारोबारी और श्रमिक इस चुनौती के समय एकजुट होकर अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए काम कर रहे हैं। सरकार का उद्देश्य घरेलू उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बनाए रखना और रोजगार पर किसी भी संभावित असर को कम करना है।
कार्नी ने यह भी कहा कि कनाडा लंबे समय से अमेरिका के साथ व्यापारिक विवादों को सुलझाने के लिए व्यापक प्रस्ताव देता रहा है। उनका मानना है कि बदलते वैश्विक आर्थिक माहौल में दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले सप्ताहों में दोनों पक्षों के बीच वार्ता तेज होगी और ऐसा समाधान निकलेगा जिससे दोनों देशों को समान लाभ मिल सके।
उन्होंने दोहराया कि कनाडा मुक्त और निष्पक्ष व्यापार का समर्थक है। इसी सोच के तहत देश ने हाल के समय में कई नई आर्थिक और सुरक्षा साझेदारियां विकसित की हैं। कार्नी के अनुसार, व्यापारिक विवादों का सबसे अधिक असर आम उपभोक्ताओं, कारोबारियों और उद्योगों पर पड़ता है। उनका कहना है कि बढ़े हुए शुल्क से वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि हो सकती है, जिससे दोनों देशों के नागरिकों पर आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका है।
अमेरिका ने अपने फैसले के पीछे यह तर्क दिया है कि कनाडा कुछ अमेरिकी उत्पादों, विशेष रूप से ऑटोमोबाइल, मादक पेय और डेयरी वस्तुओं के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार करता है। इसी आधार पर अमेरिकी प्रशासन ने विशेष कानूनी प्रावधानों का उपयोग करते हुए सैकड़ों कनाडाई उत्पादों पर अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने का निर्णय लिया है। हालांकि ऊर्जा, पोटाश, महत्वपूर्ण खनिज, मछली और पहले से अलग शुल्क व्यवस्था के तहत आने वाले कुछ उत्पादों को इस फैसले से बाहर रखा गया है।
नई शुल्क व्यवस्था के लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों, आपूर्ति श्रृंखला और विभिन्न उद्योगों पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष जल्द किसी सहमति पर नहीं पहुंचते हैं तो उत्तरी अमेरिका के व्यापारिक वातावरण में अनिश्चितता बढ़ सकती है। ऐसे समय में कनाडा की ओर से बातचीत की पेशकश इस बात का संकेत है कि वह टकराव के बजाय संवाद के माध्यम से समाधान तलाशने की रणनीति पर आगे बढ़ना चाहता है, जबकि अमेरिका के अगले कदम पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
