उत्तराखंड बना खेल और पर्यावरण संरक्षण का अग्रदूत: धामी
– मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 28वीं अखिल भारतीय वन खेल मीट का किया शुभारंभ
– प्रतियोगिता में 42 टीमों के 3390 खिलाड़ी कर रहे प्रतिभाग, इनमें 700 महिला खिलाड़ी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि 28वीं अखिल भारतीय वन खेल मीट और सांस्कृतिक प्रतियोगिता की मेजबानी का सौभाग्य उत्तराखंड को मिलना प्रदेशवासियों के लिए गर्व की बात है। आयोजन के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव का आभार व्यक्त किया। धामी ने प्रतिभागी 42 टीमों के 3390 खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दीं, इनमें 700 से अधिक महिला खिलाड़ी शामिल हैं। कहा कि खेल केवल शारीरिक तंदरुस्ती का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास और राष्ट्र निर्माण का भी आधार हैं। कहा कि उत्तराखंड खेल और पर्यावरण संरक्षण का अग्रदूत बना है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज रायपुर में आयोजित 28वीं अखिल भारतीय वन खेल मीट का शुभारंभ पर यह बात कहीं। मुख्यमंत्री ने देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे वन अधिकारियों, खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों का स्वागत करते हुए कहा कि खेल व्यक्ति में अनुशासन, टीम वर्क और संघर्ष की भावना विकसित करते हैं। कहा कि वन कर्मियों का फिट रहना अत्यंत आवश्यक है। क्योंकि वही वन और पर्यावरण की रक्षा के असली प्रहरी हैं। कहा कि राज्य सरकार खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ-साथ वन संपदा के संरक्षण और संवर्धन के लिए भी सतत प्रयासरत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में संपन्न हुए 38वें राष्ट्रीय खेलों को उत्तराखंड ने ‘ग्रीन गेम्स’ की थीम पर आयोजित किया है, जहां सभी सामग्री ई-वेस्ट और रिसाइकल्ड मटेरियल से तैयार की गई। उन्होंने कहा कि 2.77 हेक्टेयर भूमि पर ‘खेल वन’ विकसित किया गया है, जहां पदक विजेताओं के नाम पर 1600 से अधिक रुद्राक्ष के पौधे लगाए गए हैं। यह स्थल खेल उत्कृष्टता के साथ हरित चेतना का प्रतीक बनेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य का लगभग 71 प्रतिशत क्षेत्र वनाच्छादित है, जो इसे देश का आक्सीजन बैंक और वाटर टावर बनाता है।
उन्होंने कहा कि राज्य में छह राष्ट्रीय उद्यान, सात वन्यजीव विहार और चार संरक्षण आरक्षित क्षेत्र हैं। जो पूरे देश के औसत से कहीं अधिक है। वन्यजीव संरक्षण के लिए राज्य सरकार ने जीपीएस ट्रैकिंग, ड्रोन सर्विलांस, डाग स्क्वायड जैसी आधुनिक तकनीकें लागू की हैं। इस अवसर पर इस दौरान वन मंत्री सुबोध उनियाल, राज्यसभा सदस्य नरेश बंसल, कल्पना सैनी, विधायक उमेश शर्मा काऊ, खजान दास और सविता कपूर, प्रमुख वन सचिव आरके सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक समीर सिन्हा, नोडल अधिकारी पीके पात्रो, डीएफओ चकराता वैभव कुमार आदि मौजूद रहे।
मानव-वन्यजीव संघर्ष में बढ़ी मुआवजा राशि
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष की मुआवजा राशि को छह लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दिया गया है। सीएम यंग ईको-प्रिन्योर योजना के तहत युवाओं को नेचर गाइड, ड्रोन पायलट, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर, ट्रेकिंग गाइड और इको-टूरिज्म उद्यमी के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। साथ ही कैंटर राइड जैसी पहलों से स्थानीय समुदायों को वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन से जोड़कर उनकी आजीविका सशक्त की जा रही है। उन्होंने कहा कि कार्बेट में आधुनिक रेस्क्यू सेंटर स्थापित किया गया है।
जू सफारी और लेपर्ड कंजर्वेशन सेंटर के लिए मांगा सहयोग
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से हल्द्वानी जू सफारी परियोजना और उत्तरकाशी में प्रस्तावित स्नो लेपर्ड कंजर्वेशन सेंटर की स्वीकृति के लिए सहयोग का अनुरोध किया। कहा कि यह दोनों परियोजनाएं राज्य के पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण हैं। मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों से आग्रह किया कि यदि आप इस स्टेडियम परिसर में अपनी माता के नाम पर एक पौधा लगाएंगे तो यह मां के प्रति प्रेम और सम्मान का प्रतीक होगा।
