June 11, 2026

Uttarakhand samachar: अधिकारियों की संपत्ति का ब्योरा ACR का हिस्सा, सार्वजनिक करना संभव नहीं

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Right to Information
  • परिवारजनों की सुरक्षा को खतरा

लोक अधिकारियों की संपत्ति की जानकारी सार्वजनिक करने से उनके परिवारजनों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है और इस कारण इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। राज्य सूचना आयोग ने एक मामले की सुनवाई के दौरान सिंचाई विभाग के सूचना अधिकारी के इस तर्क को सही पाया है।

आयोग ने पीएमजीएसवाई, सिंचाई खंड के सूचना अधिकारी के इस तर्क को भी स्वीकार किया है कि किसी अधिकारी की संपत्तियों की जानकारी उसकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) का हिस्सा होती है, जिसे केवल निर्धारित विभागीय उच्च अधिकारियों के द्वारा ही देखा जा सकता है।

सूचना अधिकारी के इस तर्क को सूचना आयोग ने तब स्वीकार किया है जब इसी मामले की सुनवाई के दौरान उसने पाया कि राज्य शासनादेश के कारण लोक अधिकारियों के द्वारा अपनी संपत्तियों की जानकारी स्वप्रकटन के रूप में विभाग की वेबसाइट पर दर्ज कराना अनिवार्य है।

ऐसे समझें पूरा मामला
देहरादून के इंदिरा नगर के विनय जायसवाल नाम के एक व्यक्ति ने सूचना के अधिकार के अंतर्गत सिंचाई विभाग के एक अधिकारी की संपत्तियों की जानकारी मांगी थी। इसके उत्तर में लोक सूचना अधिकारी ने बताया कि मांगी गई सूचना अधिकारी के जीवन और सुरक्षा से संबंधित है, इसलिए उसे उपलब्ध नहीं कराया जा सकता। इससे असंतुष्ट अपीलकर्ता ने प्रथम और द्वितीय अपील दायर की थी।

अपील में क्या हुआ
सुनवाई के दौरान सूचना आयोग ने पाया कि संबंधित पक्ष के अधिकारी की असहमति के कारण उक्त सूचना को देने से इनकार किया गया था। अधिकारी ने सूचना अधिकारी से अपील की थी कि उनकी संपत्तियों की जानकारी देना उनकी निजता को भंग करना है। इससे उनके परिवार के सदस्यों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने अनुरोध किया था कि उनके परिवार की सुरक्षा को ध्यान में रखें।

तर्क: अपीलकर्ता का
अपीलकर्ता का तर्क था कि राज्य शासनादेश (26 मार्च 2012 को जारी) के अंतर्गत सभी लोक अधिकारियों को अपनी संपत्तियों का ब्योरा स्वप्रकटन के तौर पर अपने नियोक्ता अधिकारी को उपलब्ध कराना अनिवार्य है। प्रत्येक वर्ष 31 मार्च तक इस सूचना को विभाग की वेबसाइट पर प्रकाशित कराना भी अनिवार्य है। अपीलकर्ता के अनुसार स्वप्रकटन की श्रेणी में होने और विभागीय वेबसाइट पर दर्ज किए जाने के कारण संपत्ति की जानकारी को गोपनीय नहीं माना जा सकता। वहीं आयोग के निर्देश पर लोक सूचना अधिकारी ने बताया था कि किसी अधिकारी की संपत्तियों की जानकारी उसकी वार्षिक गोपनीय चरित्र पंजिका यानी एसीआर का हिस्सा होती है। जिसे उच्च विभागीय अधिकारियों के द्वारा ही देखा जा सकता है। आयोग ने इस मामले में इस तर्क को सही पाया।

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