ओवेरियन कैंसर के 6 शुरुआती संकेत जिन्हें महिलाएं अक्सर कर देती हैं नजरअंदाज, समय रहते पहचान बचा सकती है जान
लंबे समय तक ओवेरियन कैंसर को “साइलेंट कैंसर” कहा जाता रहा है, लेकिन डॉक्टरों का मानना है कि यह बीमारी पूरी तरह खामोश नहीं होती। यह शरीर को कई छोटे-छोटे संकेत देती है, जिन्हें समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है। सबसे आम लक्षणों में लगातार पेट फूलना शामिल है। यदि बिना किसी स्पष्ट कारण के पेट हमेशा फूला हुआ महसूस हो या कपड़े अचानक टाइट लगने लगें, तो इसे सामान्य गैस की समस्या समझकर टालना ठीक नहीं है।
दूसरा महत्वपूर्ण संकेत है कम खाना खाने के बाद भी पेट भरा हुआ महसूस होना। यदि थोड़ी मात्रा में भोजन करने के बावजूद बार-बार ऐसा लगे कि पेट पूरी तरह भर गया है, तो यह शरीर की चेतावनी हो सकती है। इसके साथ ही पेट के निचले हिस्से या पेल्विक एरिया में लगातार दर्द या दबाव महसूस होना भी ओवेरियन कैंसर का शुरुआती संकेत माना जाता है। यदि यह दर्द बार-बार लौटता है या लंबे समय तक बना रहता है, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
महिलाओं को अपने मासिक धर्म चक्र में होने वाले बदलावों पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। अनियमित पीरियड्स, अत्यधिक या बहुत कम ब्लीडिंग, अचानक मासिक चक्र में बदलाव या मेनोपॉज के बाद किसी भी प्रकार की ब्लीडिंग गंभीर संकेत हो सकते हैं। कई बार महिलाएं इसे सामान्य हार्मोनल बदलाव मानकर नजरअंदाज कर देती हैं, जबकि यह किसी गंभीर बीमारी की शुरुआत भी हो सकती है।
इसके अलावा असामान्य वेजाइनल डिस्चार्ज भी चिंता का विषय हो सकता है। यदि डिस्चार्ज में दुर्गंध हो, खून के निशान दिखाई दें या मेनोपॉज के बाद इस प्रकार की समस्या हो, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए। बार-बार पेशाब लगना या अचानक यूरिन संबंधी आदतों में बदलाव भी ओवेरियन कैंसर के संकेतों में शामिल हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इनमें से कोई भी लक्षण दो सप्ताह से अधिक समय तक बना रहे या महीने में 12 दिनों से ज्यादा महसूस हो, तो जांच करवाना बेहद जरूरी है। जिन महिलाओं के परिवार में ब्रेस्ट, ओवेरियन या कोलन कैंसर का इतिहास रहा है, उन्हें विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए क्योंकि उनमें आनुवंशिक जोखिम अधिक हो सकता है।
चूंकि ओवेरियन कैंसर की पहचान के लिए कोई नियमित और प्रभावी स्क्रीनिंग टेस्ट उपलब्ध नहीं है, इसलिए जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। शरीर के संकेतों को समझना और समय पर डॉक्टर से परामर्श लेना इस गंभीर बीमारी से लड़ाई में सबसे महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
