October 24, 2026

Uttarakhand samachar: 1128 किमी सड़कों का होगा सर्वे, तय होगी स्पीड लिमिट

0
roads servey - Main
  • 12 सड़कों को किया गया चि​ह्नित

देवभूमि उत्तराखंड में साल दर साल बढ़ती जा रही सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए परिवहन विभाग जहां एक ओर प्रदेश के दुर्घटना संभावित क्षेत्रों और ब्लैक स्पॉट्स पर काम कर रही है, तो वहीं दूसरी ओर प्रदेश के 12 सड़क मार्गों को चि​ह्नित किया गया है. इन सड़क मार्गों की गति सीमा को नए सिरे से निर्धारण किया जाने को लेकर सर्वे कराया जाएगा. कुल मिलाकर प्रदेश की 1128 किलोमीटर सड़क का सर्वे किया जाएगा और सर्वे के आधार पर अलग-अलग क्षेत्र के अनुसार, गति सीमा तय की जाएगी. इसके लिए परिवहन विभाग जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है.

प्रदेश की 12 सड़क मार्गों के 1128 किमी रोड का होगा सर्वे: सड़क मार्गों की गति सीमा को लेकर भारत सरकार की ओर से पहले ही अधिसूचना जारी है. इसके तहत अलग-अलग सड़कों पर वाहनों के आधार पर सीमा निर्धारित है।

लेकिन नगर सीमा के राष्ट्रीय राजमार्गों की बात करें तो हल्के मोटर वाहनों के लिए अधिकतम गति सीमा 70 किलोमीटर प्रति घंटा, मध्यम एवं भारी मोटर वाहनों/मालवाहक वाहनों के लिए 60 किलोमीटर प्रति घंटा, तिपहिया वाहनों के लिए 50 किलोमीटर प्रति घंटा और दोपहिया वाहनों के लिए 60 किलोमीटर प्रति घंटा अधिकतम गति सीमा निर्धारित है। लेकिन उत्तराखंड जैसे विषम भौगोलिक स्थितियां वाले राज्य में खासकर पर्वतीय मार्गों पर नए सिरे से गति सीमा निर्धारण करने की पहल समय-समय पर उठती रही है।

वाहनों की गति सीमा:तय की जाएगी
इसके पीछे की मुख्य वजह यही है कि पर्वतीय क्षेत्रों में सड़कों की स्थिति मैदानी क्षेत्र के मुकाबले काफी अधिक भिन्न होती है। पर्वतीय क्षेत्रों की सड़क मार्ग काफी अधिक घुमावदार होने के साथ ही अधिकांश जगहों पर ढलान और चढ़ाई वाली होती है। ऐसे में क्षेत्र की स्थिति और सड़कों की स्थिति को देखते हुए। राज्य की परिस्थितियों के अनुरूप गति सीमा निर्धारण करने की जरूरत महसूस हो रही है। क्योंकि सड़क दुर्घटनाएं लगातार परिवहन विभाग और सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं। यही वजह है कि परिवहन विभाग ने प्रदेश भर के 12 सड़क मार्गों की गति सीमा तय करने का निर्णय लिया है। इसके लिए सड़क मार्ग का चयन भी कर लिया गया है। जल्द ही टेंडर के जरिए सर्वे करने वाली कंपनी का भी चयन कर लिया जाएगा।

सर्वे: प्रदेश के इन सड़क मार्गों का होगा
कर्णप्रयाग से बदरीनाथ मार्ग के 125 किमी रोड का सर्वे होगा। ये रोड चमोली जिले में आती है। ऋषिकेश-चिन्यालीसौड़-उत्तरकाशी मार्ग के 190 किमी रोड का सर्वे होगा। ये सड़क मार्ग देहरादून, टिहरी गढ़वाल और उत्तरकाशी में पड़ेगा। विकासनगर-यमुना ब्रिज-बड़कोट मार्ग की 100 किमी रोड का सर्वे होगा। ये सड़क देहरादून, टिहरी गढ़वाल और उत्तरकाशी जिलों में पड़ेगी।

धरासू बैंड-ब्रह्मखाल-बड़कोट मार्ग के 56 किमी रोड का भी सर्वे होगा। ये सड़क उत्तरकाशी में है। रानीखेत से कर्णप्रयाग मार्ग के 125 किमी रोड का भी सर्वे होगा। ये सड़क अल्मोड़ा और चमोली जिले में है. देहरादून से मसूरी मार्ग की 35 किमी रोड का भी सर्वे होगा। ये सड़क देहरादून जिले में है. देहरादून-सेलाकुई-विकासनगर मार्ग की 42 किमी रोड का सर्वे भी होगा। ये सड़क देहरादून जिले में है। ऋषिकेश-हरिद्वार-रुड़की-नारसन मार्ग की 75 किमी रोड का भी सर्वे होगा। ये सड़क देहरादून और हरिद्वार जिलों में आती होगी।

आईएसबीटी, देहरादून से डाटकाली टनल मार्ग के 07 किमी रोड का सर्वे होगा. ये रोड देहरादून जिले में पड़ती है। टनकपुर से जसपुर मार्ग के 250 किमी रोड का भी सर्वे होगा। ये रोड चंपावत और उधम सिंह नगर जिले में आती है। कालाढूंगी से नैनीताल मार्ग के 38 किमी रोड का सर्वे होगा। ये सड़क नैनीताल जिले में है. हल्द्वानी से रानीखेत मार्ग के 85 किमी रोड का भी सर्वे होना है। ये सड़क नैनीताल और अल्मोड़ा दो जिलों को जोड़ती है।

उत्तराखंड के संयुक्त परिवहन आयुक्त, राजीव कुमार मेहरा के मुताबिक सड़क दुर्घटनाओं के पीछे सबसे महत्वपूर्ण कारण वाहनों की गति देखी जा रही है। वाहनों की गति अधिक होने की वजह सड़कों का सुधारीकरण और ऑटोमोबाइल सेक्टर में हुई काफी प्रगति को माना जा रहा है। ऐसे में वाहनों की गति अधिक होने की वजह से दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिस पर नियंत्रण करने की जरूरत है। इसके लिए सड़कों के गति सीमा को नए सिरे से निर्धारित करने की जरूरत है। क्योंकि जब तक गति सीमा का निर्धारण नहीं हो जाता, तब तक ये कहना काफी मुश्किल होगा कि कौन से बहनी की स्पीड कितनी होनी चाहिए।

सर्वे: देहरादून से कर्णप्रयाग रोड का हो चुका

ऐसे में उत्तराखंड परिवहन विभाग ने ट्रायल के रूप में देहरादून से कर्णप्रयाग तक यानी 207 किलोमीटर के इस सड़क मार्ग का सर्वे फरीदाबाद स्थित इंस्टिट्यूट ऑफ़ रोड ट्रैफिक एजुकेशन (आईआरटीई) से करवाया था. आईआरटी ने देहरादून- ऋषिकेश- कर्णप्रयाग सड़क मार्ग की गति सीमा तय की है। इसके बाद प्रदेश के अन्य सड़क मार्गों पर भी गति सीमा तय करने की जरूरत महसूस हुई. जिसके लिए उनकी अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई। जिस कमेटी की बैठक में प्रदेश की 12 सड़क मार्गों का गति सीमा तय करने के लिये चयन किया गया है. इन सभी सड़क मार्गों का सर्वे करने के लिए, जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू करने जा रहे हैं। टेंडर के जरिए चयनित कंपनी इन सभी सड़क मार्गों का सर्वे करेगी और उसकी रिपोर्ट के आधार पर संबंधित आरटीओ उस गति सीमा से संबंधित सांकेतिक बोर्ड लगाएंगे।

 

 

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *