Good News: 20 हजार रुपये तक बढ़ेगा उपनल कर्मियों का वेतन, 2400 ग्रेड पे का मिलेगा लाभ
– कैबिनेट में प्रस्ताव पास

Equal Pay For Equal Work : उपनल कर्मियों के लिए अच्छी खबर है। कैबिनेट ने उपनल कर्मियों के समान कार्य-समान वेतन के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है। गुरुवार शाम सीएम पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगी। कल हुई कैबिनेट बैठक में वन मंत्री सुबोध उनियाल की अध्यक्षता में गठित सब कमेटी की रिपोर्ट को रखा गया था। सब कमेटी ने रिपोर्ट में 12 वर्ष की बजाय 10 साल की सेवा पूरी करने वाले उपनल कर्मचारियों को समान काम के लिए समान वेतन देने की संस्तुति की थी। कैबिनेट ने इसे मंजूरी दे दी है। सचिव (गोपन) शैलेश बगौली के मुताबिक फैसले का लाभ पहले चरण में 2015 से पहले नियुक्त उपनल कर्मचारियों को मिलेगा। उन्होंने बताया कि 2015 से 2018 के बीच नियुक्त कर्मचारियों के संबंध में भविष्य में फैसला लिया जाएगा। शैलेश बगौली के मुताबिक सभी विभागों को अपने यहां तैनात उपनल कर्मियों से दो माह में सीधा अनुबंध करना होगा। अनुबंध के बाद इन कर्मचारियों का उपनल से कोई संबंध नहीं रहेगा। उपनल भविष्य में सिर्फ पूर्व सैनिकों के पुनर्वास से जुड़े काम देखेगा। विभागों में आउटसोर्स सेवाओं के लिए अलग से व्यवस्था बनाई जाएगी।
वेतन: 42 हजार रुपये मिलेगा
उत्तराखंड में उपनल कर्मचारियों को समान काम का समान वेतन मिलते ही उनके वेतन में 20 हजार रुपए महीने तक का बढ़ोत्तरी हो जाएगी। अभी उपनल के डाटा एंट्री ऑपरेटरों को 21 हजार रुपए वेतन मिल रहा है। समान वेतन के रूप में 2400 ग्रेड पे मिलते ही वेतन 42 हजार रुपए हो जाएगा। अभी इन कर्मचारियों को कुशल, अर्द्धकुशल श्रेणियों में उपनल से तय वेतनमान मिलता है। इनके समान काम का समान वेतन के दायरे में आते ही इन्हें इनके पद के तय ग्रेड पे के पहले वेतनमान का लाभ मिलेगा। साथ ही यदि भविष्य में इन कर्मचारियों को नियमित रूप से महंगाई भत्ते का लाभ भी मिलेगा, तो इनके वेतन में नियमित इजाफा भी होता रहेगा।
रंग लाया 10 साल का आंदोलन
समान कार्य समान वेतन की मांग पर उपनल कर्मचारी साल 2018 से आंदोलनरत हैं। उनका आंदोलन 10 साल से जारी था। नवंबर 2018 में नैनीताल हाईकोर्ट ने उनकी पीड़ा को वाजिब मानते हुए सरकार को समान कार्य समान वेतन देने, चरणबद्ध तरीके नियमितीकरण के लिए नीति बनाने के आदेश दिए। लेकिन, सरकार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष पुनर्विचार याचिका दायर कर दी। उपनल कर्मचारियों ने हिम्मत नहीं हारी और न्यायालय में लड़ाई जारी रखी।
