Uttarakhand samachar: रिफाइंड तेल हुआ महंगा, 2300 रुपये प्रति टिन तक पहुंचा
– खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध का असर

खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध का असर अब देहरादून के बाजार में भी दिखाई देने लगा है। पिछले कुछ दिनों में रिफाइंड तेल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जो 15 किलो का टिन कुछ दिन पहले तक करीब 2200 रुपये में बिक रहा था, वह अब बढ़कर लगभग 2300 रुपये तक पहुंच गया है।
व्यापारियों के मुताबिक युद्ध के कारण आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव का असर स्थानीय बाजार पर भी पड़ रहा है। बाजार से जुड़े लोगों के अनुसार पहले 15 किलो का टिन 2200 रुपये तक मिल रहा था लेकिन अब इसकी कीमत करीब 2300 रुपये हो गई है।
वहीं बाजार में रिफाइंड का (900 एमएल) का पैकेट 105 रुपये से बढ़कर करीब 110 रुपये तक में बिक रहा है। व्यापारी विक्की गोयल ने बताया कि देहरादून में रिफाइंड तेल मुख्य रूप से गुजरात से आता है जबकि सोयाबीन तेल अमेरिका सहित अन्य देशों से आयात किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है।
विशेष: कई लोगों का मानना होता है (यहां तक की बाजार में भी कई लोग इस पर चर्चा करते मिल जा रहे हैं) कि खाड़ी युद्ध से तो केवल कच्चे तेल (crude oil) पर ही पड़ता है ऐसे में रिफाइंड तेल का इससे क्या लेना देना।
ऐसे में यह जान लें कि भारत में रिफाइंड तेल (जैसे पाम ऑयल, सोयाबीन ऑयल, सूरजमुखी ऑयल) का बड़ा हिस्सा खाड़ी और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से आयात होता है। युद्ध या तनाव से शिपिंग लागत और सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है।
जानकारों के मुताबिक खाड़ी क्षेत्र में युद्ध होने से समुद्री मार्ग असुरक्षित हो जाते हैं, बीमा प्रीमियम और माल ढुलाई खर्च बढ़ जाता है। इसका सीधा असर रिफाइंड तेल की कीमत पर पड़ रहा है। साथ ही युद्ध के समय डॉलर मज़बूत होता है और आयात महंगा हो जाता है। चूंकि रिफाइंड तेल आयातित है, अत: इसकी कीमत पर इसका असर देखने को मिल रहा है। (इसके अलावा कई बार व्यापारी और आयातक भविष्य की अनिश्चितता देखते हुए स्टॉक जमा करने लगते हैं, जिससे बाज़ार में कृत्रिम कमी पैदा होती है और दाम ऊपर चले जाते हैं।)
उधर, सूखे मेवों की आपूर्ति पर भी युद्ध का असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। व्यापारी देवेंद्र साहनी के अनुसार देहरादून में पिस्ता मुख्य रूप से ईरान से आता है। फिलहाल इसके दाम नहीं बढ़े हैं लेकिन यदि आपूर्ति प्रभावित होती है तो आने वाले दिनों में कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।
