August 29, 2026

नेपाल: आइस एवलांच की वजह से हुई घटना, हैंगिंग ग्लेशियर टूटने का भी अंदेशा

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  • तबाही का कारण भूकंप नहीं, मृतकों की संख्या 626 पहुंची

नेपाल के रसुवा-धडिंग जिले में आपदा में भारी तबाही हुई है। इस घटना के पीछे वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक हैंगिंग ग्लेशियर के टूटने को भी प्रारंभिक वजह बता रहे हैं। संस्थान के वैज्ञानिक भूकंप को कारण नहीं माना है।

संस्थान के वैज्ञानिक डॉ.मनीष मेहता ने बताया कि अभी जो जानकारी सामने आ रही है, उसमें ग्लेशियर के आसपास जो एक्टिविटीज हुई है, वहां पर आइस एवलांच की वजह से घटना हुई है। आइस एवलांच जैसा मटेरियल आया, जिसने वहां पर डैमिंग की। उसने वहां पर पानी को रोका। कुछ देर बाद वह फ्लश फ्लड होकर डाउन स्ट्रीम में चला गया। उसके बाद उसमें और नदियों के पानी मिलते रहे।

इससे पानी बढ़ता हुआ डाउन स्ट्रीम में चला गया, यह हो सकता है। लेकिन ग्लेशियर लेक जैसा नहीं दिखाई दे रहा है। लंगतांग के दूसरी तरफ जहां से वह टूटा है, वहां पर हैंगिंग ग्लेशियर है, हैंगिंग ग्लेशियर के आज के दौर में टूटने के चांस ज्यादा हैं। इसके अलावा एक अन्य कारण भी हो सकता है। जैसा की धराली में घटना हुई थी, उसी तरह यहां पर भी घटना हो सकती है।

डॉ.मेहता बताते हैं कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव दिखाई दे रहा है, जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियर पीछे जा रहे हैं, वह लूज मटेरियल (मलबा) छोड़कर जा रहे हैं। इन लूज मैटेरियल में पानी सोखने आदि की क्षमता कम होती है। ऐसे में अगर बारिश या बर्फबारी होगी तो वह ढीला होकर टूटकर नीचे गिरने लगते हैं या नदी के प्रवाह को बाधित करते हैं। इसके अलावा भूस्खलन भी हो सकता है।

भूकंप नहीं कारण : डॉ.गहलोत
संस्थान के निदेशक डॉ विनीत गहलोत कहते हैं कि पहले घटना के पीछे एक कारण भूकंप भी बताया जा रहा था, पर बाद में स्पष्ट हुआ कि भूकंप नहीं था।

नेपाल में मृतकों की संख्या 626 पहुंची…


वहीं दूसरी ओर नेपाल और तिब्बत में आई भयानक बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 600 से अधिक हो गई, जबकि 2,400 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए गए हैं. जिनमें से 320 भारतीय नागरिक है. फिलहाल प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य जारी है. लापता लोगों को ढूंढने के लिए बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है. द हिमालयन टाइम्स के मुताबिक, लापता लोगों में 644 विदेशी नागरिक शामिल हैं.

नेपाल पुलिस की ओर से शनिवार सुबह साझा की गई ताजा जानकारी के अनुसार, नेपाल में आई भयानक बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 626 हो गई है. जबकि 2426 लोग लापता हैं. लापता लोगों में नेपाली सेना के 45 जवान, नेपाल प्रहरी के 27 जवान औ सशस्त्र प्रहरी बल नेपाल के 13 जवान शामिल हैं.

पुलिस ने बताया कि खोज, बचाव और राहत ऑपरेशन के लिए कुल 8799 पुलिस वालों को तैनात किया गया है.

नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने शुक्रवार शाम 7 बजे को बताया कि रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए 15,431 सुरक्षाकर्मियों को लगाया गया है, जिसमें नेपाल आर्मी के 6,755 लोग, नेपाल पुलिस के 4,473 लोग और आर्म्ड पुलिस फोर्स के 4,203 लोग शामिल हैं.

NDRRMA के मुताबिक, चितवन में सबसे अधिक 233 शव मिलें, इसके बाद नवलपरासी ईस्ट में 154, गोरखा में 46, धाडिंग में 40, नुवाकोट में 37, तनहुन में 30, नवलपरासी वेस्ट में 27 और रसुवा में 12 शव मिले. लापता 1,924 लोगों में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के कर्मी, विदेशी नागरिक, आम लोग और सुरक्षा और सरकारी कर्मचारी शामिल हैं. अकेले हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स के 933 कर्मी लापता बताए गए हैं, जबकि 517 विदेशी नागरिकों का अभी तक कोई पता नहीं चला है. NDRRMA के मुताबिक, लापता लोगों की सूची में नेपाल आर्मी के 45 लोग, नेपाल पुलिस के 28 लोग, आर्म्ड पुलिस फोर्स के 13 लोग, कस्टम ऑफिस के 15 लोग और इमिग्रेशन ऑफिस के 15 लोग शामिल हैं, जबकि लांगटांग नेशनल पार्क से भी तीन लोगों के लापता होने की खबर है.

रेस्क्यू टीमों ने अब तक 4,451 लोगों को सुरक्षित निकाला है, जिसमें शुक्रवार को हाइड्रोइलेक्ट्रिक टनल से बचाए गए 191 लोग और हवाई रास्ते से निकाले गए 517 लोग शामिल हैं. 129 विदेशी नागरिकों को भी बचाया गया है.

उधर, तिब्बत में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 7 हुई; 554 अभी भी लापता
नेपाल सीमा के पास तिब्बत में आई भयंकर बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर सात हो गई है, और 554 लोग अभी भी लापता हैं. तिब्बत इमरजेंसी मैनेजमेंट डिपार्टमेंट ने शनिवार को यह जानकारी दी. डिपार्टमेंट ने कहा कि बचाव और राहत टीमों ने प्रभावित इलाकों में लापता लोगों को खोजने के प्रयास तेज कर दिए हैं.

मृतकों की संख्या बढ़कर 616 हुई
नेपाल पुलिस की ओर से शनिवार सुबह साझा की गई ताजा जानकारी के अनुसार, नेपाल में आई भयानक बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 616 हो गई है. पुलिस ने बताया कि खोज, बचाव और राहत ऑपरेशन के लिए कुल 8799 पुलिस वालों को तैनात किया गया है.

किस जिले में कितने शव मिले-

रसुवा: 13
नुवाकोट: 89
धाडिंग: 45
चितवन: 233
गोरखा: 48
तनहुन: 31
नवलपरासी ईस्ट: 158
नवलपरासी वेस्ट: 47

ग्लेशियर टूटने से नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़
वहीं हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर के प्रो. राकेश कुमार मैखुरी कहते हैं कि नेपाल में बाढ़ के पीछे ग्लेशियर के टूटने और बर्फ-पत्थरों के बड़े मलबे के नदी में गिरने की आशंका जताई जा रही है। वैज्ञानिकों के प्रारंभिक अध्ययन के अनुसार, ग्लेशियर से टूटकर आए बर्फ और चट्टानों के मलबे ने नदी का रास्ता रोक दिया। इससे वहां पानी जमा होकर एक अस्थायी झील या प्राकृतिक बांध बन गया। बाद में यह बांध टूट गया और भारी मात्रा में पानी, मिट्टी और पत्थर तेजी से नीचे की ओर बह निकले।

प्रो.मैखुरी कहते हैं कि जलवायु परिवर्तन से इस तरह की घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है। बढ़ते तापमान से ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और बर्फ कमजोर हो रही है। इससे ग्लेशियर के टूटने, चट्टानों के खिसकने और हिमस्खलन की घटनाओं की आशंका बढ़ती है। हिमालय की ऊंची और खड़ी ढलानों तथा संकरी घाटियों में जब बड़ी मात्रा में बर्फ, चट्टान और मलबा अचानक नदी में गिरता है, तो बहुत कम समय में विनाशकारी बाढ़ आ सकती है।

राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र ने भारत में 28043 ग्लेशियर झीलों की पहचान की है, जिसमें से अधिकांशतः हिमालयी क्षेत्रों में स्थित है। लगातार बदलती हुई जलवायु दशाओं और ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ते प्रभाव के चलते यह अनुमान लगाना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि आने वाले समय में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति भारत के हिमालयी राज्यों में भी देखने को मिल सकती है। हिमालय में बढ़ते तापमान और बदलते मौसम के बीच ऐसी घटनाओं की निगरानी और समय रहते चेतावनी की व्यवस्था को और मजबूत करना बेहद जरूरी है।

नेपाल बाढ़ पर NDMA के पूर्व सलाहकार का बयान
वहीं नेपाल में भयानक बाढ़ पर NDMA के पूर्व सलाहकार सफी अहसान रिजवी ने कहा, “ग्लेशियल पिघलना एक सच्चाई है, और हिमालय की झीलों से लाखों क्यूबिक मीटर पानी बहकर आ सकता है.”

ज्यादा शवों को मैनेज करना हो रहा मुश्किल
नेपाल में कास्की के मुख्य जिला अधिकारी कुमन सिंह गुरुंग ने का, “कास्की के हॉस्पिटल की कुल क्षमता 88 है. हमें तनहुन, नवलपरासी ईस्ट और धाडिंग से शव मिल रहे हैं. कुल मिलाकर, हमारे पास 47 शव आ चुके हैं. अभी और शव मिल रहे हैं, और अज्ञात शवों के लंबे समय तक स्टोर होने से हालात और मुश्किल हो सकते हैं. अधिकारी ‘अज्ञात और लावारिस शवों के प्रबंधन के लिए दिशानिर्देश, 2021’ के तहत शवों को मैनेज कर रहे हैं, जिसके तहत जिला पुलिस प्रमुख के नेतृत्व वाली एक कमेटी शवों को मैनेज करने के लिए जिम्मेदार है.”

नेपाल में बाढ़ के बाद उत्तराखंड में अलर्ट
इस बीच, नेपाल में फ्लैश फ्लड से भारी तबाही के बाद अब उत्तराखंड में 13 ग्लेशियल झीलों को संवेदनशील माना गया है. इन झीलों से पहाड़ी इलाकों में खतरे की आशंका को देखते हुए सीएम धामी ने अधिकारियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने झीलों की नियमित निगरानी करने के लिए कहा है. साथ ही सुरक्षा के इंतजाम मजबूत करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

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