March 8, 2026

Rudraprayag News: तुंगनाथ से नई दिल्ली तक ‘हरेला मैराथन’ शुरू

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  • हरेला पर्व को राष्ट्रीय पर्व घोषित करने की मांग 


देवभूमि उत्तराखंड के प्रसिद्व पर्व हरेला पर्व को राष्ट्रीय पर्व घोषित करने की मांग को लेकर पंच केदार में से तीसरे केदार तुंगनाथ मंदिर से नई दिल्ली के लिए 500 किमी हरेला मैराथन दौड़ शुरू हो गई है।
इस मैराथन दौड़ में उत्तराखंड की फ्लाइंग गर्ल भागीरथी बिष्ट, सिरमौरी चीता और अंतरराष्ट्रीय एथलीट सुनील शर्मा सहित अन्य कई खिलाड़ी भाग ले रहे हैं।

हरेला पर्व की मान्यता
हरेला एक लोकपर्व है जो मूल रूप से उत्तराखण्ड राज्य के कुमाऊँ क्षेत्र में मनाया जाता है। हरेला पर्व वर्ष में तीन बार आता है.
1. चैत्र माह में प्रथम दिन बोया जाता है तथा नवमी को काटा जाता है।
2. श्रावण माह में सावन लगने से नौ दिन पहले आषाढ़ में बोया जाता है और दस दिन बाद श्रावण के प्रथम दिन काटा जाता है।
3. आश्विन माह में आश्विन माह में नवरात्र के पहले दिन बोया जाता है और दशहरा के दिन काटा जाता है।
चैत्र व आश्विन माह में बोया जाने वाला हरेला मौसम के बदलाव का सूचक है।
चैत्र माह में बोया एवं काटा जाने वाला हरेला गर्मी के आने की सूचना देता है, तो आश्विन माह की नवरात्रि में बोया जाने वाला हरेला सर्दी के आने की सूचना देता है।

पहले दिन मैराथन तुंगनाथ मंदिर से चोपता, मक्कूमठ होते हुए रुद्रप्रयाग पहुंची। इसके बाद बृहस्पतिवार को सुबह सात बजे पंच केदार में तृतीय केदार तुंगनाथ मंदिर में उत्तराखंड के पवित्र लोकपर्व हरेला को राष्ट्रीय पर्व घोषित करने की मांग को लेकर राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दौड़ चुके धावकों ने हरेला मैराथन दौड़ शुरू की।

तुंगनाथ मंदिर से चोपता होते हुए बनियाकुंड से मक्कूमठ के रास्ते से यह मैराथन रुद्रप्रयाग पहुंची।
हरेला मैराथन दौड़ का आयोजन करने वाले अभिषेक मैठाणी ने बताया कि 20 सितंबर को मैराथन रुद्रप्रयाग से देवप्रयाग, 21 सितंबर को देवप्रयाग से ऋषिकेश, 22 सितंबर को ऋषिकेश से रामपुर तिराहा मुज्जफरनगर, 23 सितंबर को रामपुर तिराहा से मेरठ और 24 सितंबर को मेरठ से नई दिल्ली गढ़वाल भवन पहुंचेगी।

इस मैराथन का मुख्य उद्देश्य यही है कि हरेला पर्व को राष्ट्रीय पर्व घोषित किया जाये। इसके लिए नई दिल्ली में गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी के द्वारा मांगपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपा जाएगा।

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