March 8, 2026

Uttarakhand samachar: दूसरे राज्यों के हिस्ट्रीशीटरों का ठिकाना बन रहा देहरादून

0
Dehradun becoming criminal area
  • अब सुनील राठी गैंग का शूटर गिरफ्तार

अपराध और कानून व्यवस्था के मामले में शांत शहर की पहचान रखने वाला देहरादून धीरे-धीरे दूसरे राज्यों के अपराधियों का ठिकाना बनता जा रहा है। हाल के दिनों में सामने आए मामलों ने पुलिस और खुफिया एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।

पहले झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर विक्रम शर्मा ने दून में अपना ठिकाना बनाया था और अब कुख्यात सुनील राठी गैंग का शूटर पारस भी देहरादून से गिरफ्तार हुआ है। उसे एसटीएफ और देहरादून पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में पकड़ा गया। आरोपी लंबे समय से यहां अपनी गतिविधियां चला रहा था। उसके खिलाफ 2019 में डालनवाला थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई थी।

गोली मारकर गैंगस्टर विक्रम शर्मा की हत्या की
बताया जा रहा है कि उसका संबंध पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुख्यात आपराधिक गिरोह राठी गैंग से रहा है और वह पहले मुख्तार अंसारी और संजीव जीवा गैंग से भी जुड़ा रहा है। इससे पहले झारखंड का कुख्यात गैंगस्टर विक्रम शर्मा की सिल्वर सिटी मॉल में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार देहरादून में तेजी से बढ़ता शहरीकरण, बड़ी संख्या में किराये के मकान और बाहरी लोगों की आवाजाही ऐसे कारण हैं जिनकी वजह से अपराधी यहां आसानी से पहचान छिपाकर रह पाते हैं। कई मामलों में यह भी सामने आया है कि मकान मालिक बिना पुलिस सत्यापन कराए ही किरायेदार रख लेते हैं जिससे अपराधियों को यहां पनाह मिल जाती है।

ऐसी पनाहगाह खत्म करने के लिए पुलिस ऑपरेशन क्रैकडाउन चला रही है। इस दौरान बड़ी संख्या में ऐसे लोग चिह्नित किए गए हैं जिनका सत्यापन नहीं कराया गया था। दून पुलिस ने सैकड़ों मकान मालिकों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए भारी जुर्माना भी लगाया है।

एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल के अनुसार दूसरे राज्यों के अपराधियों की गतिविधियों की खुफिया निगरानी बढ़ाई जा रही है। सत्यापन अभियान को भी तेज किया गया है ताकि शहर को अपराधियों की शरणस्थली बनने से रोका जा सके। यदि कोई मकान मालिक बिना सत्यापन के किसी बाहरी व्यक्ति को किराये पर रखता है और उसका आपराधिक रिकॉर्ड सामने आता है तो मकान मालिक के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सात मामले: पारस पर मुजफ्फरनगर में दर्ज हैं
राजपुर थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किए गए सुनील राठी गैंग के शूटर पारस पर मुजफ्फरनगर में सात मामले दर्ज हैं। इसके अलावा एक प्राथमिकी देहरादून में भी दर्ज है। पारस पर थाना शामली क्षेत्र में 2012 और 2015 में हत्याएं करने का आरोप है। देहरादून के डालनवाला थाना में धमकी देने के मामले में प्राथमिकी दर्ज है। 2020 में मुजफ्फरनगर कोतवाली में गैंगस्टर एक्ट में भी प्राथमिकी दर्ज है। राजपुर थाना में दर्ज ताजा मामले को मिलाकर पारस के खिलाफ अब तक कुल नौ मामले दर्ज होना प्रकाश में आया है।

ऑटोमेटिक पिस्टल पर लिखा था मेड इन यूएसएकुख्यात पारस और भानु के पास मिली दो ऑटोमेटिक पिस्टलों पर मेड इन यूएसए लिखा हुआ है। आरोपियों के पास इन हथियारों का कोई लाइसेंस नहीं मिला। इन हिस्ट्रीशीटरों तक अमेरिका में बने हथियार कैसे पहुंचे ये भी सवाल खड़ा हो रहा है।

जमीन के विवाद: सुनील राठी के नाम से निपटाते थे
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे जेल में बंद कुख्यात अपराधी सुनील राठी के संपर्क में हैं और उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में विवादित जमीनों के मामलों को उसके नाम के डर से निपटवाते थे। इसके बदले मोटी रकम वसूलते थे। पुलिस को आशंका है कि वे देहरादून में रंगदारी या अन्य गंभीर अपराध की योजना से आए थे।

शिकायतकर्ता: डर के मारे नहीं आ रहे सामने
सुनील राठी के नाम का खौफ ऐसा है कि इस गैंग के रंगदारी वसूलने से परेशान लोग डर के मारे सामने नहीं आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार देहरादून में करीब आधा दर्जन लोग इस गैंग की वसूली से परेशान हैं लेकिन खुलकर पुलिस से शिकायत तक नहीं कर रहे हैं।

गुर्गों के पास कार वीआईपी नंबर की
पुलिस टीम ने सहस्रधारा रोड पर फॉरेस्ट चुंगी के पास घेराबंदी कर पैसिफिक गोल्फ एस्टेट की ओर से आ रही जिस काली स्कॉर्पियो-एन को रोककर सुनील राठी गैंग के दो गुर्गों को पकड़ा उस कार में वीआईपी नंबर था। कार का यूपी 51 बीएस 0001 नंबर है। कार को भानू ने अपने भाई उदित के नाम होना बताया। बताया जा रहा है कि इस गैंग के पास 0001 नंबर की कुछ और कारें भी हैं। गैंग के गुर्गे भौकाल बनाने के लिए वीआईपी नंबरों की कार से घूमते हैं।

पौड़ी जेल: सुनील राठी से मिलने कई बार गया
पारस वर्ष 2012 में हत्या के मुकदमे में मुजफ्फरनगर में जेल गया था उसके बाद कुख्यात संजीव जीवा के संपर्क में आ गया। उसके मरने के बाद में सुनील राठी के संपर्क में आया। इसके बाद उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में सक्रिय रूप से अपराध करने लगा। मैं पिछले साल दो बार भानू के साथ अप्रैल और जून में और एक बार अगस्त में अकेले पौड़ी गढ़वाल जेल में बंद सुनील राठी से मिलने गया था।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *