देवभूमि उत्तराखंड की बेटी निमिषा कर्नाटक के शोध ने एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की दुनिया ही बदल दी है। वह व वर्ल्ड बैंक की अंतरराष्ट्रीय सलाहकार और यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड (लंदन) की शोधार्थी भी हैं।
उन्होंने गूगल डीपमाइंड,लंदन के साथ भी काम करते हुए उन्होंने छोटे व्यापारियों के लिए एक एआई प्रोटोटाइप विकसित किया। जो उन्हें ब्रांड-विशेष के लिए विज्ञापन बनाने में हेल्प करता है। इस तकनीक का यूएस पेटेंट भी फाइल हो चुका है।
उनके पिता डाॅ. अजीत कर्नाटक काफी साल पहले जीबी पंत कृषि विवि में कार्य कर चुके हैं। निमिषा की शुरुआती शिक्षा पंतनगर में ही हुई है। पंतनगर विवि से कंप्यूटर साइंस में बीटेक करने के बाद निमिषा आईआईटी से एमटेक कर पीएचडी करने लंदन गईं।
एआई की दुनिया में जहां हर कोई सबसे बड़े और ताकतवर मॉडल बनाने की होड़ में है, वहीं निमिषा ने इसके भविष्य की नई तस्वीर सामने ला दी है। एआई की असल ताकत बड़ा होना और ताकतवर मॉडल की जगह हर जगह की भाषा, संस्कृति और जरूरतों के लिए बनाए गए जानकार और स्थानीय एआई समाधानों में है, यहीं उनका भी मानना है। इस शोध मुख्यरूप से एआई को भरोसेमंद, प्रूफ से जुड़ा और निश्चित सीमाओं के आधार पर बनाना था। भविष्य की तकनीक इंसानों पर हावी न हो, यह तो उनका शोध निश्चित करता ही है साथ ही ये सबसे खास और भरोसेमंद दोस्त भी बन सकेगा। इसके साथद ही यह एआई का मनगढ़ंत और झूठी बातें बताना भी रोकेगा।