March 8, 2026

उत्तराखंड खनन विभाग का बड़ा रिकॉर्ड, वित्तीय वर्ष 2024-25 में 1100 करोड़ का मिला राजस्व

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Uttarakhand Mining Department News: उत्तराखंड के खनन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में 1100 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त किया है, ये अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड है। यह राज्य बनने के बाद पहली बार हुआ है कि विभाग ने तय समय में इतनी बड़ी मात्रा में राजस्व प्राप्त किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में , कई नए प्रयोग किए गए, सही तकनीक का इस्तेमाल किया गया। अवैध खनन पर सख्ती की गई तब कही जाकर ये लक्ष्य प्राप्त हुआ है।

खनन निदेशक राजपाल लेघा की कार्यकुशलता भी इस सब के पीछे एक वजह मानी जा रही है। दरअसल राजपाल लेघा ने मुख्यमंत्री के निर्देशों को जमीनी स्तर पर अमल में लाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने खनन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए ई नीलामी और ई टेंडरिंग प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू किया। जिससे खनन पट्टों के आवंटन में पारदर्शिता आई और भ्रष्टाचार पर रोक लगी। वही खनन विभाग ने अपनी तकनीकी निगरानी को भी बढ़ावा देते हुए आरएफआईडी आधारित ट्रैकिंग सिस्टम, नाइट विजन कैमरे और जीपीएस तकनीक का उपयोग कर खनन वाहनों की रियल टाइम मॉनिटरिंग शुरू की।

निगरानी का 45 स्थायी माइन चेक पोस्ट से दायरा बढ़ा
उत्तराखंड में 45 स्थायी माइन चेक पोस्ट को सक्रिय किया गया है, जिससे निगरानी का दायरा और भी अधिक बढ़ा है। राज्य में अवैध खनन पर नकेल कसने के लिए जिला स्तर पर एंटी इलीगल माइनिंग टास्क फोर्स का गठन किया गया। इस फोर्स में राजस्व, खनन, वन और पुलिस विभाग के साथ-साथ पर्यावरण विशेषज्ञों और ग्राम प्रधानों को भी शामिल किया गया। इन टीमों ने मिलकर छापेमारी की और अवैध खनन, अवैध भंडारण और परिवहन पर लगाम लगाने का कार्य किा, जिससे खनन माफियाओं में खौफ कायम हुआ है।

वर्ष 2024-25 में अवैध खनन से संबंधित 2176 प्रकरणों में 74.22 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया। यह वर्ष 2020-21 की तुलना में करीब चार गुना अधिक है। जब 2752 मामलों में मात्र 18.05 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया था, यह आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि सरकार की सख्ती का असर जमीन पर नजर आया और अवैध गतिविधियों में भारी गिरावट आई है।

खनन विभाग की कार्यवाही: सीएम धामी ने की सराहना
खनन क्षेत्र में यह सुधार केवल राजस्व तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे राज्य के हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर भी प्राप्त हुए। खनन गतिविधियों से जुड़े वाहन चालक, मशीन ऑपरेटर, मजदूर, और अन्य सेवा प्रदाता वर्गों को इससे आर्थिक मजबूती मिली है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खनन विभाग की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि, यह प्रदेश में पारदर्शी और ईमानदार शासन प्रणाली की जीत है। ई-गवर्नेंस, तकनीकी नवाचार और प्रतिबद्ध प्रशासनिक अधिकारियों के प्रयासों से यह संभव हो पाया है। उन्होंने खनन निदेशक राजपाल लेघा और उनकी टीम की विशेष रूप से सराहना की है।

राजपाल लेघा ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, इस सफलता के लिए मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन और विभागीय अधिकारियों की मेहनत से ही हम यह लक्ष्य हासिल कर पाए हैं। उन्होंने कहा कि हमारा अगला प्रयास खनन से पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हुए विकास को आगे बढ़ाना होगा। खनन विभाग की यह ऐतिहासिक उपलब्धि न केवल आर्थिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह राज्य प्रशासन के उत्तरदायी और पारदर्शी शासन की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम भी है।

 

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