उत्तराखंड आंदोलन की विरासत को संजोती ‘निनाद 2025’ की अभिलेख गैलरी

उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस समारोह ‘निनाद 2025’ में इस बार भावनाओं और इतिहास का सुंदर संगम देखने को मिला। हिमालयन संस्कृति केंद्र, गढ़ी कैंट में उत्तराखंड संस्कृति विभाग और राज्य अभिलेखागार द्वारा तैयार की गई फोटो अभिलेख गैलरी ने राज्य आंदोलन की स्मृतियों को फिर से जीवंत कर दिया है।
यह गैलरी उन संघर्षमय दिनों की तस्वीरों, दस्तावेजों और पत्राचारों से भरी है, जिन्होंने उत्तराखंड राज्य के निर्माण की नींव रखी। इसमें आंदोलन के दौरान हुए जुलूसों, धरनों, रैलियों और रणनीतिक बैठकों के दुर्लभ फोटोग्राफ शामिल हैं। वहीं, पृथक राज्य संयुक्त संघर्ष समिति के नेताओं द्वारा तत्कालीन उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकारों के साथ हुए पत्राचार भी प्रदर्शनी का हिस्सा हैं।

समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्टों और संपादकीय लेखों के माध्यम से यह गैलरी आंदोलन की वैचारिक यात्रा को भी बखूबी दर्शाती है। इन दस्तावेजों से साफ झलकता है कि यह आंदोलन केवल भूगोल नहीं, बल्कि पहचान, अस्मिता और आत्मनिर्णय की लड़ाई थी।
राज्य अभिलेखागार के उपनिदेशक आशीष कुमार बताते हैं कि महानिदेशक युगल किशोर पंत की प्रेरणा और दृष्टि से यह गैलरी तैयार की गई है, ताकि राज्य स्थापना दिवस केवल उत्सव नहीं बल्कि आत्ममंथन का अवसर भी बने।

गैलरी में मनोज जखमोला, विनोद सिंह पंवार, जगदीश बोरा और सुशील कुमार जैसे विशेषज्ञ आगंतुकों को दस्तावेजों के संरक्षण की तकनीक और अभिलेखीय महत्व के बारे में जानकारी दे रहे हैं। यह पहल न केवल इतिहास को देखने का अवसर देती है, बल्कि उसे संरक्षित रखने की चेतना भी जगाती है।
कुल मिलाकर, ‘निनाद 2025’ की यह अभिलेख गैलरी उत्तराखंड आंदोलन की स्मृतियों को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का सार्थक प्रयास साबित हो रही है — जहां संघर्ष की तस्वीरें प्रेरणा बनकर झिलमिला रही हैं।
